पटना। बिहार में आय से अधिक संपत्ति के मामले में आर्थिक अपराध इकाई यानी ईओयू ने कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार, 8 अक्टूबर को चार जिलों में उनके पांच ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली गई। कार्रवाई के दौरान 52 लाख रुपये से अधिक नकदी, करीब 30 लाख रुपये मूल्य के गहने और संपत्ति तथा निवेश से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। पटना में उनकी सास के नाम खरीदी गई जमीन भी जांच के दायरे में है। ईओयू के अनुसार, इस जमीन का बाजार मूल्य लगभग डेढ़ करोड़ रुपये है। jagran.com
नारद कुमार दास योजना एवं विकास विभाग के अंतर्गत मुंगेर में कार्यपालक अभियंता के पद पर तैनात हैं। उनके खिलाफ प्राथमिक जांच में ज्ञात वैध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के प्रथमदृष्टया साक्ष्य मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया। जांच एजेंसी ने शुरुआती आकलन में 83 लाख 53 हजार 200 रुपये की अनुपातहीन संपत्ति का आरोप लगाया है। यह राशि उनकी ज्ञात आय से लगभग 64.93 प्रतिशत अधिक बताई गई है। इसी मामले में अदालत से तलाशी की अनुमति लेकर अलग-अलग टीमों ने कार्रवाई शुरू की। Tarun Mitra
ईओयू थाने में 7 अक्टूबर को कांड संख्या 28/26 दर्ज किया गया था। मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2), सहपठित धारा 13(1)(बी), के तहत दर्ज हुआ है। इसके बाद विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना से तलाशी अधिपत्र प्राप्त किया गया। अगले दिन अधिकारियों के नेतृत्व में गठित टीमों ने आवासों, सरकारी कार्यालय और संपत्ति से जुड़े ठिकानों पर दबिश दी। कार्रवाई का आधार प्राथमिक जांच में सामने आया आय और संपत्ति का अंतर है। आरोपों की जांच अभी जारी है। Tarun Mitra
तलाशी अभियान पटना, मुंगेर, भागलपुर और मुजफ्फरपुर में चलाया गया। मुंगेर में दो स्थानों को जांच के दायरे में लिया गया, जिनमें कासिम बाजार थाना क्षेत्र के बेलन बाजार, बंगाली टोला स्थित किराये का आवास और स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल का सरकारी कार्यालय शामिल है। अन्य ठिकानों में भागलपुर के तिलकामांझी स्थित पैतृक आवास, मुजफ्फरपुर के नया टोला स्थित राधिका अपार्टमेंट का फ्लैट और पटना के रूपसपुर क्षेत्र की संपत्ति शामिल रही। चार जिलों में कुल पांच जगहों पर टीमों ने तलाशी ली। jagran.com
नकदी की सबसे बड़ी बरामदगी मुजफ्फरपुर के राधिका अपार्टमेंट स्थित फ्लैट से हुई। ईओयू के मुताबिक, यहां 50 लाख 50 हजार रुपये मिले। नकदी नोटों की गड्डियों में रखी गई थी और गिनती के लिए मशीन मंगाई गई। मुंगेर के किराये के आवास से भी एक लाख 70 हजार रुपये नकद मिले। दोनों स्थानों की बताई गई रकम मिलाकर कुल नकदी 52 लाख 20 हजार रुपये होती है। तलाशी के दौरान मिली नकदी के साथ अन्य वित्तीय रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं। 
मुंगेर स्थित आवास से लगभग 30 लाख रुपये मूल्य के गहने मिलने की जानकारी सामने आई है। यहां हुंडई आई-10 स्पोर्ट्स कार, मोटरसाइकिल और खरीद से संबंधित रसीदें भी मिलीं। गहनों और वाहनों के अलावा जांच एजेंसी को निवेश से जुड़े कागजात हाथ लगे हैं। नकदी की बरामदगी से अलग इन वस्तुओं और दस्तावेजों का विवरण भी कार्रवाई में शामिल है। इससे संपत्ति की जांच केवल बैंक में जमा रकम या जमीन तक सीमित नहीं रही है।
पटना के रूपसपुर थाना क्षेत्र के कुसुमपुरम मोहल्ले में खरीदी गई जमीन इस मामले का एक अहम पहलू है। ईओयू के अनुसार, नारद दास ने वर्ष 2026 में अपनी सास बीना विद्यार्थी के नाम लगभग 3.9 डिसमिल जमीन खरीदी थी। खरीद की रकम 50 लाख रुपये बताई गई है। जमीन का सरकारी मूल्य 68 लाख 41 हजार रुपये और बाजार मूल्य लगभग डेढ़ करोड़ रुपये बताया गया है। खरीद की राशि, सरकारी मूल्य और बाजार मूल्य अलग-अलग आंकड़े हैं।
जांच एजेंसी का कहना है कि जमीन खरीद के भुगतान में नारद दास की पत्नी के बैंक खाते से राशि ट्रांसफर होने के प्रमाण मिले हैं। ईओयू ने इस लेनदेन में कई स्तरों पर राशि स्थानांतरित किए जाने की बात कही है। जमीन सास के नाम दर्ज होने और भुगतान में पत्नी के खाते का इस्तेमाल सामने आने के कारण यह लेनदेन जांच का हिस्सा बना है। हालांकि, जांच में सामने आए इन तथ्यों को अभी आरोपों के संदर्भ में ही देखा जा रहा है।
चार बैंक खातों में जमा कुल 17 लाख 15 हजार 688 रुपये फ्रीज कराए गए हैं। तलाशी में बैंक पासबुक, चेकबुक और बीमा तथा अन्य निवेश से जुड़े दस्तावेज भी मिले। भागलपुर के पैतृक आवास से भूखंड खरीद के कागजात और लगभग पांच लाख रुपये की ज्वेलरी खरीद से संबंधित रसीद मिली है। यह रसीद खरीद का दस्तावेज है; इसे वहां उतनी कीमत के गहने बरामद होने का दावा नहीं माना जा सकता। ईओयू की कार्रवाई के बाद बरामद नकदी, संपत्ति के दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन इस मामले की जांच का आधार बने हैं।
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