बाढ़ के बीच नाव में गूंजी किलकारी, अस्पताल जाते समय महिला ने स्वस्थ बच्चे को दिया जन्म
दामोदरपुर। चारों तरफ बाढ़ का पानी, आवागमन के लिए नाव का सहारा और अस्पताल पहुंचने की चिंता के बीच दामोदरपुर गांव में एक परिवार के लिए मुश्किलों भरा सफर यादगार पल में बदल गया। सोमवार शाम करीब पांच बजे अस्पताल ले जाई जा रही गर्भवती महिला ने नाव में ही स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के बाद नाव में मौजूद परिवार के सदस्यों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
दामोदरपुर पंचायत के वार्ड संख्या आठ निवासी रविकांत पासवान की पत्नी चांदी देवी को प्रसव पीड़ा होने के बाद अस्पताल ले जाने की तैयारी की गई थी। इलाके में बाढ़ के कारण सड़क मार्ग से निकलना संभव नहीं था। ऐसे में परिजनों ने नाव की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया।
अस्पताल पहुंचने से पहले हुआ प्रसव
परिवार के सदस्य चांदी देवी को नाव में बैठाकर अस्पताल की ओर लेकर जा रहे थे। इसी दौरान उनकी प्रसव पीड़ा बढ़ गई। अस्पताल पहुंचने से पहले ही नाव में प्रसव की स्थिति बन गई और महिला ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।
बाढ़ के पानी के बीच नाव पर बच्चे की पहली किलकारी सुनते ही वहां मौजूद लोगों की चिंता खुशी में बदल गई। परिजनों ने मां और बच्चे को संभाला और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था की।
नाविकों ने मांगा नेग
बेटे के जन्म के बाद नाव चला रहे सुनील बिंद और बिजली बिंद भी खुश नजर आए। खुशी के माहौल में दोनों नाविकों ने परंपरा के अनुसार परिवार से नेग मांगना शुरू कर दिया।
मुश्किल परिस्थितियों में सुरक्षित तरीके से परिवार को ले जा रहे नाविकों के लिए भी यह घटना खास बन गई। कुछ समय पहले तक नाव में अस्पताल पहुंचने की चिंता थी, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद माहौल पूरी तरह बदल गया।
आश्रयस्थल पर बांटी गई मिठाई
बच्चे के जन्म की खबर जब आश्रयस्थल तक पहुंची तो वहां मौजूद बाढ़ पीड़ितों के बीच भी खुशी का माहौल बन गया। परिवार ने लोगों के बीच मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी साझा की।
बाढ़ की परेशानी झेल रहे लोगों के लिए भी यह घटना राहत और खुशी का पल लेकर आई। चारों ओर पानी और रोजमर्रा की मुश्किलों के बीच नवजात के जन्म ने आश्रयस्थल का माहौल बदल दिया।
बाढ़ ने मुश्किल बनाया अस्पताल का रास्ता
दामोदरपुर और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित है। कई रास्तों पर पानी होने के कारण लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।
ऐसी परिस्थितियों में गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। चांदी देवी के परिवार के सामने भी यही समस्या थी।
प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद परिवार के पास नाव से अस्पताल जाने के अलावा कोई आसान विकल्प नहीं था।
मां और बच्चे को लेकर परिवार में खुशी
बच्चे के सुरक्षित जन्म के बाद रविकांत पासवान और उनके परिवार ने राहत महसूस की। बाढ़ के कारण पहले से परेशान परिवार के लिए नवजात का आगमन बड़ी खुशी लेकर आया।
परिवार के लोगों ने बताया कि अस्पताल पहुंचने की कोशिश के दौरान उन्हें लगातार चिंता बनी हुई थी। लेकिन नाव में ही सुरक्षित प्रसव होने और स्वस्थ बेटे के जन्म के बाद उनकी चिंता दूर हुई।
बाढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौती
यह घटना बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच की चुनौती को भी सामने लाती है। बाढ़ के दौरान सड़क संपर्क टूटने से एंबुलेंस और अन्य वाहनों का गांवों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में नाव ही मरीजों को सुरक्षित स्थान या अस्पताल तक पहुंचाने का प्रमुख साधन बन जाती है। गर्भवती महिलाओं के मामले में समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होना विशेष रूप से जरूरी होता है।
नाविक निभा रहे महत्वपूर्ण भूमिका
बाढ़ प्रभावित इलाकों में नाविक लोगों के आवागमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कहीं लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है तो कहीं जरूरी सामान और मरीजों को नाव के जरिए लाया जा रहा है।
चांदी देवी को अस्पताल ले जाने के दौरान सुनील बिंद और बिजली बिंद ने भी इसी जिम्मेदारी को निभाया। हालांकि अस्पताल पहुंचने से पहले ही नाव में बच्चे का जन्म हो गया और यह सफर परिवार के लिए यादगार बन गया।
मुश्किलों के बीच उम्मीद की तस्वीर
बाढ़ के कारण जहां कई परिवार घर, रोजगार और रोजमर्रा की सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे हैं, वहीं दामोदरपुर की यह घटना मुश्किल परिस्थितियों के बीच उम्मीद की तस्वीर बनकर सामने आई है।
चारों ओर फैले बाढ़ के पानी के बीच नाव में जन्मे बच्चे की किलकारी ने परिवार के साथ आश्रयस्थल पर मौजूद लोगों को भी खुशी का मौका दिया। नवजात के आगमन की खुशी में मिठाई बांटी गई और परिवार ने सुरक्षित प्रसव पर राहत जताई।