भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले में पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अवैध हथियारों और कारतूसों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। संयुक्त टीम ने उत्तर प्रदेश से बिहार लाई जा रही 19 हजार 250 जिंदा कारतूसों की खेप पकड़ने के साथ तीन संदिग्ध तस्करों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से एक लोडेड पिस्टल भी बरामद की गई है। इतनी बड़ी मात्रा में कारतूस मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कारतूस कहां से खरीदे गए थे और बिहार में किन लोगों तक पहुंचाए जाने वाले थे।
यह कार्रवाई सोमवार, 2 नवंबर को भोजपुर जिले के कोईलवर थाना क्षेत्र में आरा-पटना राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुल्हड़िया टोल प्लाजा के पास की गई। पटना एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने सूचना के आधार पर संदिग्ध एसयूवी की घेराबंदी की थी। वाहन की तलाशी लेने पर भारी मात्रा में जिंदा कारतूस मिलने से अधिकारी भी हैरान रह गए। पुलिस के मुताबिक, यह खेप उत्तर प्रदेश से बिहार लाई जा रही थी।
गुप्त सूचना पर पुलिस ने बिछाया जाल
जानकारी के मुताबिक, बिहार एसटीएफ को सूचना मिली थी कि उत्तर प्रदेश से कारतूसों की बड़ी खेप लेकर कुछ लोग बिहार आने वाले हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ ने भोजपुर पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त अभियान की योजना तैयार की।पुलिस को संदिग्ध वाहन के आने की जानकारी मिलते ही आरा-पटना राष्ट्रीय राजमार्ग पर निगरानी बढ़ा दी गई। कुल्हड़िया टोल प्लाजा के आसपास पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। सोमवार सुबह करीब 10 बजे संदिग्ध एसयूवी वहां पहुंची तो संयुक्त टीम ने उसे रोकने का प्रयास किया।बताया जा रहा है कि पुलिस की घेराबंदी देखकर वाहन में सवार लोगों ने भागने की कोशिश की। इस दौरान उनकी गाड़ी की अन्य वाहनों से टक्कर भी हो गई। हालांकि, पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए तीनों संदिग्धों को पकड़ लिया।
कार से मिले 19,250 जिंदा कारतूस
पुलिस ने जब संदिग्ध वाहन की तलाशी ली तो उसमें बड़ी संख्या में कारतूस बरामद हुए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बरामद कारतूसों में 7.65 एमएम के कारतूस शामिल हैं।पुलिस ने कुल 19,250 जिंदा कारतूस बरामद होने की जानकारी दी है। इसके अतिरिक्त एक आरोपी के पास से लोडेड पिस्टल भी मिली है।इस बरामदगी के बाद पुलिस को आशंका है कि कारतूसों की सप्लाई किसी बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क के माध्यम से की जा रही थी। हालांकि, इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।पुलिस ने कारतूसों और हथियार को जब्त कर आगे की जांच शुरू कर दी है। बरामद सामग्री की आपूर्ति और संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है।
मुजफ्फरपुर और सीवान से जुड़े हैं गिरफ्तार आरोपी
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों में दो मुजफ्फरपुर जिले और एक सीवान जिले का रहने वाला है।प्रारंभिक पूछताछ में यह जानकारी सामने आई है कि कारतूसों की खेप उत्तर प्रदेश से लाई जा रही थी। इसे मुजफ्फरपुर सहित उत्तर बिहार के विभिन्न इलाकों में पहुंचाने की योजना होने की बात सामने आई है।जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों के संपर्क किन-किन जिलों में मौजूद हैं। इस कारोबार में हथियार और कारतूस उपलब्ध कराने वाले लोग कौन हैं और खरीदारी करने वालों का नेटवर्क कितना बड़ा है।पुलिस को उम्मीद है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में इस अवैध कारोबार से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
वाराणसी में रुके थे संदिग्ध
जांच में सामने आई प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संदिग्ध रविवार की रात वाराणसी में रुके थे। सोमवार सुबह उनके बिहार की ओर रवाना होने की सूचना मिलने पर पुलिस और एसटीएफ की टीम सक्रिय हो गई।आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पहले से तैयारी की गई थी। जैसे ही संदिग्ध एसयूवी भोजपुर जिले में पहुंची, पुलिस ने उसे घेर लिया।सदर एसडीपीओ-2 रणजीत कुमार सिंह के अनुसार, आरोपियों ने अपनी गतिविधियों को गोपनीय रखने के लिए विशेष सावधानी बरती थी। वे कथित तौर पर मोबाइल फोन और जीपीएस जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल से बच रहे थे, ताकि उनकी लोकेशन का पता नहीं चल सके।
बड़ी खेप मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे
कारतूसों की भारी बरामदगी की सूचना मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। पटना से एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारी भी कोईलवर पहुंचे और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की।पुलिस अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में कारतूसों की खरीद किस माध्यम से हुई और इन्हें किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।इसके साथ ही आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जांच भी की जा रही है।अधिकारियों का ध्यान विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सक्रिय संभावित तस्करी नेटवर्क पर है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इसी गिरोह ने पहले भी बिहार के विभिन्न जिलों में कारतूसों की आपूर्ति की थी।
क्या अपराधियों तक पहुंचने वाली थी गोलियों की खेप?
कारतूसों की इतनी बड़ी बरामदगी के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इनकी जरूरत किसे थी। पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं इन कारतूसों की आपूर्ति आपराधिक गिरोहों को तो नहीं की जानी थी।हालांकि, अभी तक किसी विशेष आपराधिक संगठन या घटना से इस खेप का संबंध आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है।जांच एजेंसियां आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर संभावित खरीदारों और आपूर्तिकर्ताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।पुलिस का मानना है कि पूरे नेटवर्क का खुलासा होने पर अवैध हथियार और कारतूस तस्करी के अन्य मामलों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
कार को लेकर सामने आई अलग जानकारी
इस मामले में वाहन को लेकर प्रकाशित खबरों में कुछ अंतर सामने आया है। कुछ शुरुआती विवरणों में टाटा हैरियर का उल्लेख किया गया है। हालांकि, अन्य रिपोर्टों के अनुसार आरोपियों की एसयूवी भागने के प्रयास में एक टाटा हैरियर और एक टाटा नेक्सन से टकराई थी। तस्करी के लिए इस्तेमाल वाहन को टाटा सफारी बताया गया है। इसलिए टाटा हैरियर को जब्त वाहन बताने से पहले आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।फिलहाल तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी और हजारों जिंदा कारतूसों की बरामदगी को अवैध हथियार तस्करी के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। पुलिस की जांच का मुख्य उद्देश्य कारतूसों के वास्तविक स्रोत, संभावित खरीदारों और पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क की पहचान करना है।
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