पढ़ाई की डांट से आहत 13 वर्षीय किशोर ने उठाया खौफनाक कदम, सल्फास खाने से मौत

Update: 2026-07-13 10:11 GMT

Bihar बिहार: नालंदा जिले के बेन थाना क्षेत्र के करजारा गांव से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां पढ़ाई को लेकर मां और परिजनों की डांट से आहत होकर एक 13 वर्षीय किशोर ने कथित रूप से सल्फास की गोली खा ली। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

मृतक किशोर की पहचान करजारा गांव निवासी टुनटुन प्रसाद के इकलौते पुत्र करण राज के रूप में हुई है। करण की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इकलौते बेटे को खोने के गम में माता-पिता सदमे में हैं।

जानकारी के अनुसार, करण राज को पढ़ाई को लेकर उसकी मां और अन्य परिजनों ने डांट लगाई थी। बताया जा रहा है कि इसी बात से किशोर काफी आहत हो गया। इसके बाद उसने घर में रखी सल्फास की गोली खा ली।

कुछ समय बाद जब परिजनों को इसकी जानकारी हुई तो घर में अफरातफरी मच गई। आनन-फानन में परिजन उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल बिहारशरीफ लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने किशोर की हालत गंभीर देखते हुए इलाज शुरू किया।

डॉक्टरों की टीम ने किशोर को बचाने का काफी प्रयास किया, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। तमाम प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। किशोर की मौत की खबर मिलते ही परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

घटना के बाद गांव के लोग भी स्तब्ध हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करण काफी छोटा था और परिवार का इकलौता बेटा था। किसी ने नहीं सोचा था कि मामूली डांट के बाद वह इतना बड़ा कदम उठा लेगा।

परिजनों के अनुसार, पढ़ाई को लेकर बच्चों को समझाना आम बात है, लेकिन इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। माता-पिता बार-बार अपने बेटे को याद कर रो रहे हैं। घर का माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया है।

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मामले की जानकारी जुटाने में लगी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं को देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और किशोरों पर पढ़ाई या किसी अन्य बात को लेकर अत्यधिक दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। किशोर उम्र में बच्चे भावनात्मक रूप से काफी संवेदनशील होते हैं और छोटी-सी बात भी उन्हें गहराई से प्रभावित कर सकती है।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, माता-पिता को बच्चों से बातचीत करते समय उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए। डांट के बजाय उन्हें समझाकर और सकारात्मक तरीके से मार्गदर्शन देना अधिक प्रभावी होता है।

यह घटना अभिभावकों के लिए भी एक सीख है कि बच्चों के व्यवहार में बदलाव, तनाव या परेशानी के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बच्चों के साथ खुलकर संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है।

फिलहाल करण राज की मौत के बाद परिवार शोक में डूबा हुआ है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना के सही कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, गांव में इस घटना को लेकर हर कोई दुखी है और लोग परिवार को सांत्वना दे रहे हैं।

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