सीतामढ़ी: कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में 15 दिवसीय समेकित पोषण प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को कृषि क्षेत्र से जुड़े स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
कार्यक्रम का उद्घाटन स्थानीय विधायक प्रो. नागेंद्र राउत और कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. राम ईश्वर प्रसाद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन समारोह में कृषि विशेषज्ञों, प्रशिक्षणार्थियों और अन्य गणमान्य लोगों ने भाग लिया।
युवाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर
प्रशिक्षण कार्यक्रम को लेकर बताया गया कि इसे सफलतापूर्वक पूरा करने वाले युवा खाद और उर्वरक के अधिकृत विक्रेता बनने के योग्य हो सकेंगे। इससे उन्हें स्वरोजगार शुरू करने का अवसर मिलेगा और वे कृषि क्षेत्र में अपनी नई पहचान बना सकेंगे।
कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से आयोजित इस प्रशिक्षण में युवाओं को उर्वरकों के सही उपयोग, मिट्टी की गुणवत्ता, पोषक तत्व प्रबंधन और किसानों को बेहतर कृषि सलाह देने से संबंधित जानकारी दी जाएगी।
आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विधायक प्रो. नागेंद्र राउत ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को केवल नौकरी तलाशने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्वरोजगार के अवसरों को भी अपनाना चाहिए। कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और सही प्रशिक्षण के माध्यम से युवा अपना व्यवसाय स्थापित कर सकते हैं।
विधायक ने कहा कि खाद और उर्वरक की बिक्री से जुड़े क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है। यह प्रशिक्षण युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करेगा।
कृषि उत्पादन बढ़ाने में पोषण प्रबंधन की भूमिका
कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि फसलों की अच्छी पैदावार के लिए संतुलित पोषण प्रबंधन बेहद जरूरी है। मिट्टी में पोषक तत्वों की सही मात्रा बनाए रखना किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता है।
प्रशिक्षण में युवाओं को बताया जाएगा कि किस फसल के लिए कौन से पोषक तत्व जरूरी हैं और उनका सही इस्तेमाल कैसे किया जाए। इससे किसानों को बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिलेगी।
वैज्ञानिकों ने दी प्रशिक्षण की जानकारी
केवीके के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. राम ईश्वर प्रसाद ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को कृषि से संबंधित व्यावहारिक और तकनीकी जानकारी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि समेकित पोषण प्रबंधन का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खाद और उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक करना है। प्रशिक्षित विक्रेता किसानों को सही सलाह देकर कृषि उत्पादन में सुधार ला सकते हैं।
किसानों को मिलेगा फायदा
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से केवल युवाओं को ही नहीं, बल्कि किसानों को भी लाभ मिलेगा। जब खाद और उर्वरक विक्रेता वैज्ञानिक जानकारी के साथ किसानों को सलाह देंगे तो फसलों में पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग संभव हो सकेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार किसान बिना जानकारी के उर्वरकों का अधिक या गलत इस्तेमाल कर देते हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। ऐसे में प्रशिक्षित विक्रेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
स्वरोजगार के लिए बेहतर अवसर
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए ऐसे प्रशिक्षण बेहद जरूरी हैं। खाद और उर्वरक बिक्री का क्षेत्र युवाओं के लिए एक बेहतर व्यवसायिक विकल्प बन सकता है।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवा संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार अधिकृत विक्रेता के रूप में काम कर सकेंगे।
15 दिनों तक चलेगा प्रशिक्षण
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कुल 15 दिनों तक चलेगा। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों को कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों की जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान, मिट्टी परीक्षण, उर्वरक प्रबंधन, किसानों से संवाद और कृषि व्यवसाय से जुड़े विषयों को शामिल किया गया है।
युवाओं में दिखा उत्साह
प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले दिन युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। प्रशिक्षणार्थियों ने कहा कि यह कार्यक्रम उन्हें रोजगार और व्यवसाय शुरू करने के लिए नई दिशा देगा।
कृषि विज्ञान केंद्र ने उम्मीद जताई है कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कई युवा कृषि क्षेत्र में अपना स्वरोजगार स्थापित करेंगे और किसानों को भी बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराएंगे।
समेकित पोषण प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ कृषि व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।