गुवाहाटी: गुवाहाटी यूनिवर्सिटी ने 6 अक्टूबर को पोस्ट-ग्रेजुएट स्टूडेंट्स यूनियन (PGSU) चुनाव 2026-27 के लिए नॉमिनेशन और शिकायत प्रक्रिया के बारे में फैलाई जा रही "गलत और गुमराह करने वाली जानकारी" को खारिज कर दिया। यूनिवर्सिटी ने कहा कि यह प्रक्रिया तय संस्थागत तरीकों से पूरी की गई थी।
यूनिवर्सिटी ने कहा कि छात्रों की उम्मीदवारी से जुड़े फैसले आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर लिए गए थे और इन पर रिटर्निंग ऑफिसर, चुनाव ट्रिब्यूनल, अपील सुनवाई समिति और शिकायत निवारण सेल ने विचार किया था।
गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. उत्पल शर्मा ने कहा कि संस्थान की जिम्मेदारी है कि वह पूरे तथ्य रिकॉर्ड पर रखे और उन्होंने इस बात से इनकार किया कि किसी खास छात्र को निशाना बनाया गया था।
शर्मा ने कहा, "इस मामले को तय संस्थागत तरीकों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर निपटाया गया है। किसी खास छात्र को निशाना बनाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।"
यूनिवर्सिटी ने बताया कि 23 सितंबर को नॉमिनेशन की जांच के दौरान, नयन आकाश बोरा और एक अन्य उम्मीदवार प्रतीक शर्मा की योग्यता से जुड़ी जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर के ध्यान में लाई गई थी।
इसके बाद मामला चुनाव ट्रिब्यूनल को भेजा गया, जिसने सलाह दी कि दोनों उम्मीदवारों के नॉमिनेशन पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। 24 सितंबर की चुनाव अधिसूचना-5/2026 में ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद नॉमिनेशन रद्द करने की बात दर्ज की गई।
यूनिवर्सिटी ने कहा कि इसके बाद की अपील प्रक्रिया भी तय तरीके से पूरी की गई। बोरा ने 25 और 26 सितंबर को अपील दायर की, जिसके बाद कानूनी राय लेने के बाद 26 सितंबर को अपील सुनवाई समिति का गठन किया गया।
यूनिवर्सिटी के अनुसार, बोरा को समिति के सामने पेश होने का मौका दिया गया और सुनवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। इसके बाद नतीजों की जानकारी संबंधित पक्षों को दी गई, जबकि 27 सितंबर को शिकायत निवारण सेल का गठन किया गया।
यूनिवर्सिटी क्लासेस के सचिव डॉ. रंजन कुमार काकती ने कहा कि घटनाओं के पूरे क्रम पर विचार करना ज़रूरी है।
काकती ने कहा, "इसलिए यह कहना गलत है कि यूनिवर्सिटी ने मनमाने ढंग से काम किया या मामले पर विचार करने का मौका नहीं दिया।" विवाद की जड़ में 'डुअल एनरोलमेंट' (एक साथ दो कोर्स में दाखिला)
यूनिवर्सिटी ने कहा कि उसके रिकॉर्ड से पता चलता है कि संबंधित छात्र ने एक ही समय में दो पोस्ट-ग्रेजुएट प्रोग्राम किए थे।
यूनिवर्सिटी के अनुसार, छात्र ने शुरू में फीस-माफी कैटेगरी के तहत एक पोस्ट-ग्रेजुएट प्रोग्राम में दाखिला लिया था, लेकिन पहले और दूसरे सेमेस्टर के सभी पेपर पास नहीं कर पाया। इसके बाद, छात्र ने फीस-माफी कैटेगरी के तहत ही एक और पोस्ट-ग्रेजुएट प्रोग्राम में दाखिला ले लिया।
यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड से यह भी पता चला कि छात्र पहले वाले प्रोग्राम के तीसरे सेमेस्टर के छात्र के तौर पर हॉस्टल में रहता रहा, जबकि बाद वाले प्रोग्राम के पहले सेमेस्टर के छात्र के तौर पर भी उसे हॉस्टल में रहने की सुविधा दी गई थी। बाद वाली सुविधा उसने स्वीकार नहीं की, जबकि पहले वाला हॉस्टल स्टेटस चालू रहा।
यूनिवर्सिटी ने कहा कि यह मामला सिर्फ़ तकनीकी नहीं है, क्योंकि फीस-माफी के नियमों के तहत दाखिला लेने और संस्थागत सुविधाओं का लाभ उठाने का असर दूसरे योग्य छात्रों पर भी पड़ता है।
काकती ने कहा कि पुरानी परंपराओं को उन व्यवस्थाओं को जारी रखने का आधार नहीं बनाया जा सकता जो तय नियमों के खिलाफ़ हैं।
उन्होंने कहा, "कोई पुरानी परंपरा ऐसी चीज़ को जारी रखने के लिए मिसाल नहीं बन सकती जो तय नियमों के मुताबिक नहीं है।"
यूनिवर्सिटी ने चुनाव नियमों का हवाला दिया
PGSU चुनाव 2026–27 के रिटर्निंग ऑफिसर प्रो. एस.के. सिंह ने कहा कि चुनाव लागू नियमों और संस्थागत ढांचे के तहत कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लिंगदोह समिति की सिफारिशों में छात्र चुनाव की एक पारदर्शी और व्यवस्थित प्रक्रिया पर ज़ोर दिया गया है, जिसमें योग्यता की शर्तें, जांच-पड़ताल और शिकायत निवारण तंत्र शामिल हैं।
सिंह ने कहा, "जब किसी उम्मीदवार की योग्यता से जुड़ी जानकारी चुनाव अधिकारियों के सामने आती है, तो लागू नियमों के अनुसार उसकी जांच की जानी चाहिए।"
उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों को तय प्रक्रिया के ज़रिए समाधान पाने का अधिकार है।
बोरा और शर्मा की उम्मीदवारी को लेकर चल रहे विवाद के बीच यूनिवर्सिटी की ओर से यह स्पष्टीकरण आया है। चुनाव ट्रिब्यूनल ने पहले सिफारिश की थी कि दो पोस्ट-ग्रेजुएट प्रोग्राम में एक साथ दाखिला लेने के कारण उनके नामांकन पर विचार न किया जाए।
गुवाहाटी यूनिवर्सिटी ने छात्रों और संबंधित लोगों से अपील की है कि वे वेरिफ़ाइड जानकारी और आधिकारिक रिकॉर्ड पर भरोसा करें और कैंपस में शांति और अनुशासन बनाए रखें। यूनिवर्सिटी ने फिर से कहा कि PGSU चुनाव 2026–27 लागू नियमों के अनुसार कराए जाएंगे और सही शिकायतों पर उचित संस्थागत मंचों के ज़रिए विचार किया जाएगा।
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