असम की चाय में कीटनाशक की समस्या मजदूरों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
कीटनाशक से चाय सुरक्षित या श्रमिकों पर खतरा असम के बागानों की हकीकत
गुवाहाटी: असम की चाय दुनिया भर में अपनी खुशबू और स्वाद के लिए मशहूर है, लेकिन चाय उत्पादन से जुड़ी एक दूसरी चिंता भी सामने आती रही है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि चाय पीने वालों के लिए कप में पहुंचने वाली चाय कितनी सुरक्षित है, बल्कि यह भी है कि चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा कितनी सुनिश्चित है।
चाय उत्पादन के दौरान कीटों से फसल को बचाने के लिए कई बार कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। इन रसायनों के उपयोग को लेकर खाद्य सुरक्षा मानकों में चाय की पत्तियों में मौजूद अवशेषों की मात्रा पर निगरानी रखी जाती है। लेकिन विशेषज्ञों और श्रमिक संगठनों का ध्यान इस बात पर भी है कि खेतों में काम करने वाले मजदूर इन रसायनों के संपर्क में कितने समय तक रहते हैं।
चाय मजदूरों पर पड़ सकता है असर
चाय बागानों में पत्तियां तोड़ने, छिड़काव करने और अन्य कामों में लगे श्रमिक सीधे तौर पर खेती से जुड़े रसायनों के संपर्क में आ सकते हैं। कुछ अध्ययनों में चाय बागान श्रमिकों में कीटनाशकों के संपर्क और स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चिंता जताई गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार कीटनाशकों का इस्तेमाल करते समय सुरक्षा उपकरण जैसे दस्ताने, मास्क और उचित सुरक्षा कपड़ों का उपयोग जरूरी है। साथ ही छिड़काव के दौरान नियमों का पालन और श्रमिकों को प्रशिक्षण देना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
चाय की गुणवत्ता और श्रमिकों की सुरक्षा दोनों जरूरी
चाय उद्योग के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ फसल को कीटों से बचाना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि उत्पादन प्रक्रिया में शामिल लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। चाय बोर्ड और उद्योग से जुड़े संगठन कीटनाशकों के जिम्मेदार उपयोग और निर्धारित मानकों के पालन पर जोर देते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चाय में रासायनिक अवशेषों को लेकर सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं।
किसानों और बागान मालिकों की भी चिंता
कीटों का प्रकोप बढ़ने से चाय उत्पादकों के सामने उत्पादन बनाए रखने की चुनौती रहती है। मौसम में बदलाव और नई बीमारियों के कारण कई क्षेत्रों में कीट नियंत्रण की जरूरत बढ़ी है। ऐसे में रसायनों के विकल्प, जैविक उपाय और बेहतर कृषि तकनीकों पर भी जोर दिया जा रहा है।
आगे का रास्ता क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित चाय उत्पादन के लिए केवल अंतिम उत्पाद की जांच पर्याप्त नहीं है। पूरी सप्लाई चेन में सुरक्षा जरूरी है, जिसमें खेतों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा भी शामिल है। इसके लिए श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना, रसायनों के सही इस्तेमाल की जानकारी देना और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी व्यवस्थाएं मददगार हो सकती हैं। असम की चाय भारत की पहचान का हिस्सा है, लेकिन इसकी असली मजबूती तभी मानी जाएगी जब चाय के हर कप के पीछे मेहनत करने वाले लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।