Guwahati गुवाहाटी: असम में तीन वाइल्डलाइफ़ रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर (बचाव और पुनर्वास केंद्र) बनाने के 'वंतारा' (एक ज़ू-कम-रेस्क्यू सेंटर) के प्रस्ताव पर राज्य के वाइल्डलाइफ़ एक्टिविस्ट और संरक्षणवादियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इनमें से एक सेंटर खास तौर पर एशियाई हाथियों की भलाई के लिए होगा। इन लोगों ने जानवरों के ट्रांसफर, पारदर्शिता, वेटेरिनरी क्षमता और वाइल्डलाइफ़ रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन के काम में प्राइवेट संस्थाओं की बढ़ती भूमिका को लेकर चिंता जताई है।
जामनगर, गुजरात में स्थित रिलायंस-समर्थित इस सुविधा केंद्र ने 12 अगस्त को असम के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग को एक पत्र लिखकर यह प्रस्ताव दिया था। राज्य के पर्यावरण और वन मंत्री ने कहा है कि इस प्रस्ताव की अभी "जांच" की जा रही है।
वंतारा का संचालन उद्योगपति मुकेश अंबानी के सबसे छोटे बेटे अनंत अंबानी करते हैं।
इसके सबसे मुखर आलोचकों में पर्यावरण पत्रकार और वाइल्डलाइफ़ एक्टिविस्ट मुबीना अख्तर शामिल हैं। उन्होंने इस प्रस्ताव पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं, खासकर बचाए गए जानवरों के इलाज और उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाने से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए।
अख्तर ने 'नॉर्थईस्ट नाउ' को बताया, "हमारे वाइल्डलाइफ़ कानूनों में किए गए संशोधनों के तहत रेस्क्यू सेंटर और ज़ू (चिड़ियाघर) को एक ही व्यापक कानूनी श्रेणी में रखा गया है, जिससे उन पर रहने की जगह, साफ़-सफाई और वेटेरिनरी (पशु चिकित्सा) से जुड़े एक जैसे नियम लागू होते हैं। वाइल्डलाइफ़ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 की धारा 2(39) के तहत, 'ज़ू' की कानूनी परिभाषा में साफ़ तौर पर ऐसी सुविधाएं भी शामिल हैं जो आम जनता के देखने के लिए नहीं होतीं, जैसे कि रेस्क्यू सेंटर और संरक्षण प्रजनन केंद्र।"
हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि एक रेस्क्यू सेंटर आम ज़ू से बुनियादी तौर पर अलग होता है।