जोरहाट। पूर्वोत्तर भारत में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय विदेश एवं कपड़ा राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को असम के जोरहाट जिले के रोवरियाह स्थित केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB) के सिल्कवर्म सीड प्रोडक्शन सेंटर (SSPC) में नवनिर्मित ग्रेनेज बिल्डिंग और अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज सुविधा का उद्घाटन किया। इन सुविधाओं का उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले रेशमकीट बीजों का उत्पादन बढ़ाना, उनके सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था मजबूत करना और क्षेत्र के रेशम उत्पादक किसानों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और कौशल विकास के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र के रेशम उद्योग को नई दिशा दी जा सकती है।
उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने कहा कि रेशम पालन को एक उत्पादक, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ आर्थिक गतिविधि बनाने के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बेहतर गुणवत्ता वाले रेशमकीट बीज, वैज्ञानिक तकनीक और प्रशिक्षित मानव संसाधन रेशम उत्पादन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।उन्होंने असम की समृद्ध रेशम परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर भारत में इस क्षेत्र के विस्तार की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। विशेष रूप से मूगा और एरी रेशम के उत्पादन में असम का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पारंपरिक रेशम उद्योग को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना और इससे जुड़े ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका के अवसरों को मजबूत करना है।
नई सुविधाओं से रेशमकीट बीज उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
जोरहाट के रोवरियाह स्थित केंद्र में स्थापित नई ग्रेनेज बिल्डिंग रेशमकीट बीज उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण सुविधा है। ग्रेनेज वह स्थान होता है, जहां नियंत्रित परिस्थितियों में रेशमकीट पतंगों से अंडे प्राप्त किए जाते हैं और स्वस्थ बीज तैयार किए जाते हैं।नई व्यवस्था के तहत सालाना लगभग 30 लाख रोगमुक्त रेशमकीट अंडों के समूह, जिन्हें डिजीज फ्री लेइंग्स (DFLs) कहा जाता है, के उत्पादन की क्षमता विकसित की गई है।इसके साथ ही स्थापित कोल्ड स्टोरेज सुविधा में लगभग एक करोड़ डीएफएल के सुरक्षित भंडारण की क्षमता उपलब्ध कराई गई है। इससे किसानों को रेशम पालन के लिए आवश्यक समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
किसानों को समय पर मिल सकेंगे गुणवत्तापूर्ण बीज
रेशम पालन में बीजों की गुणवत्ता उत्पादन को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक है। यदि बीज स्वस्थ हों और उनके रखरखाव की उचित व्यवस्था हो, तो रेशमकीट पालन में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।नई कोल्ड स्टोरेज सुविधा का उद्देश्य रेशमकीट अंडों को उपयुक्त तापमान पर सुरक्षित रखना है। इससे उनकी गुणवत्ता बनाए रखने और निर्धारित समय पर किसानों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।सरकार की इस पहल से किसानों को बीजों की उपलब्धता में आने वाली कठिनाइयों को कम करने और उत्पादन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।यह परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र वस्त्र संवर्धन योजना (NERTPS) के अंतर्गत विकसित की गई है। इस योजना का उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों में वस्त्र और रेशम उद्योग से संबंधित बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है।
असम की रेशम विरासत पर केंद्रीय मंत्री ने दिया जोर
पवित्र मार्गेरिटा ने कहा कि असम का रेशम उद्योग राज्य की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। विशेष रूप से मूगा रेशम अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक के कारण प्रसिद्ध है।असम मूगा और एरी रेशम के उत्पादन में देश का प्रमुख केंद्र है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल मूगा रेशम उत्पादन में असम की हिस्सेदारी लगभग 79 प्रतिशत और एरी रेशम उत्पादन में करीब 74 प्रतिशत है।रेशम उद्योग राज्य के अनेक ग्रामीण परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। इसमें रेशमकीट पालन, धागा निर्माण, बुनाई, प्रसंस्करण और वस्त्र तैयार करने जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
मिशन स्नेहोरी से मूगा रेशम को वैश्विक पहचान दिलाने की योजना
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने 'मिशन स्नेहोरी' की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल असम के मूगा रेशम को उच्च मूल्य वाले वैश्विक उत्पाद के रूप में विकसित करने में योगदान दे सकती हैं।मिशन स्नेहोरी की शुरुआत 2 जून 2026 को केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने की थी।इस मिशन का उद्देश्य मूगा रेशम की पूरी उत्पादन श्रृंखला को मजबूत करना है। इसमें रेशमकीट पालन, पौधों की खेती, धागा उत्पादन, बुनाई, ब्रांडिंग, गुणवत्ता प्रमाणीकरण और निर्यात को बढ़ावा देने जैसी गतिविधियां शामिल हैं।मिशन के अंतर्गत जोरहाट, शिवसागर, लखीमपुर, धेमाजी, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, माजुली और सुआलकुची सहित प्रमुख रेशम उत्पादक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
ग्रामीण रोजगार और कौशल विकास पर विशेष ध्यान
पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेशम उद्योग ग्रामीण रोजगार का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी रेशमकीट पालन, धागा निकालने और बुनाई जैसी गतिविधियों में योगदान देती हैं।वित्त वर्ष 2025-26 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेशम पालन से लगभग 29.50 लाख लोगों को रोजगार और आजीविका के अवसर मिले।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने के लिए केवल नई इमारतों और उपकरणों की स्थापना पर्याप्त नहीं है। किसानों तथा रेशम उद्योग से जुड़े लोगों को आधुनिक तकनीक और कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।उनका कहना था कि वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने से रेशम उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है और इस क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।
पूर्वोत्तर के रेशम उद्योग को मजबूत करने की पहल
नई ग्रेनेज बिल्डिंग और कोल्ड स्टोरेज सुविधा के शुरू होने से केंद्रीय रेशम बोर्ड की बीज उत्पादन तथा भंडारण क्षमता को मजबूती मिलेगी। इसका लाभ पूर्वोत्तर क्षेत्र के रेशम उत्पादक किसानों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।कार्यक्रम में केंद्रीय और राज्य सरकार के संबंधित अधिकारी तथा रेशम उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।इस परियोजना से रेशमकीट बीजों की आपूर्ति को अधिक व्यवस्थित बनाने, गुणवत्ता सुधारने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहयोग मिलने की उम्मीद है।फिलहाल सरकार पूर्वोत्तर भारत के पारंपरिक रेशम उद्योग को आधुनिक तकनीक और बेहतर बुनियादी ढांचे से जोड़ने पर जोर दे रही है। जोरहाट में शुरू हुई ये नई सुविधाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। केंद्रीय मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक संसाधनों, कौशल विकास और मिशन स्नेहोरी जैसी पहलों से असम के रेशम उद्योग की संभावनाओं को और मजबूत किया जा सकेगा।
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