गुवाहाटी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की विवादित टिप्पणी पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार (26 अक्टूबर 2026) को खड़गे के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कांग्रेस पर भारतीय संस्कृति और सभ्यता से दूर होने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का झुकाव पाकिस्तान और बांग्लादेश की संस्कृति की ओर बढ़ गया है तथा पार्टी भारतीय मूल्यों और परंपराओं का सम्मान नहीं कर रही है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
खड़गे की टिप्पणी पर हिमंत बिस्वा सरमा का पलटवार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता का उल्लेख करना अनुचित है।उन्होंने आरोप लगाया कि खड़गे पहले भी असम के प्रसिद्ध गायक और भारत रत्न से सम्मानित डॉ. भूपेन हजारिका को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुके हैं।सरमा ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को अपनी भाषा और व्यवहार में संयम रखना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी भारतीय संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं से लगातार दूर होती जा रही है।मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति कमजोर होने के पीछे उसकी विचारधारा और सांस्कृतिक दृष्टिकोण एक प्रमुख कारण है। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आकलन है।
पटना में खड़गे के बयान से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद रविवार को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर आयोजित समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भाषण दे रहे थे।इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की आलोचना की। कार्यक्रम में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सत्ता से नहीं जाएंगे। इसके जवाब में खड़गे ने ऐसी टिप्पणी की, जिसे भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता का अपमान बताया।बयान सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष से माफी मांगने की मांग की और कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए।
भूपेन हजारिका का मुद्दा भी उठाया
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस अध्यक्ष की आलोचना करते हुए असम के महान गायक और संगीतकार भूपेन हजारिका का मुद्दा भी उठाया।उन्होंने आरोप लगाया कि जब भूपेन हजारिका को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था, तब खड़गे ने उनकी आलोचना की थी। सरमा ने इसे असम की सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान से जोड़ते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए।मुख्यमंत्री ने खड़गे के बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे की कुछ पूर्व टिप्पणियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रियंक खड़गे ने असम में सेमीकंडक्टर परियोजना की घोषणा के समय राज्य को लेकर आलोचनात्मक बयान दिए थे।
खड़गे के पारिवारिक इतिहास का भी किया जिक्र
हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने बयान में मल्लिकार्जुन खड़गे के पारिवारिक इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पिता की मृत्यु रजाकारों की हिंसा के कारण हुई थी।उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक पीड़ा के बावजूद खड़गे की टिप्पणियां उन्हें दुखी करती हैं। मुख्यमंत्री ने हालांकि खड़गे की वरिष्ठता का उल्लेख करते हुए कहा कि वह इस मामले में अधिक कुछ नहीं कहना चाहते।सरमा के इन बयानों ने राजनीतिक विवाद को एक नया आयाम दे दिया है, जिसमें अब सार्वजनिक भाषा के साथ सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक घटनाओं का मुद्दा भी शामिल हो गया है।
भाजपा नेताओं ने की टिप्पणी की निंदा
खड़गे की टिप्पणी पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी आपत्ति जताई है।राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष जैसे वरिष्ठ पद पर बैठे व्यक्ति से सार्वजनिक जीवन में गरिमा और संयम बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। वहीं भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के दिवंगत परिजनों का उल्लेख राजनीतिक बहस की मर्यादा के खिलाफ है।इस मामले को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किए हैं।
कांग्रेस ने किया खड़गे का बचाव
दूसरी ओर, कांग्रेस ने खड़गे की टिप्पणी का बचाव करते हुए अलग स्पष्टीकरण दिया है। पार्टी का दावा है कि कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति ने पहले खड़गे के दिवंगत पिता का अपमान किया था।कांग्रेस के अनुसार, खड़गे की टिप्पणी प्रधानमंत्री के वास्तविक पिता के लिए नहीं, बल्कि उनके वैचारिक संदर्भ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर थी।इस प्रकार दोनों दलों की ओर से बयान के अर्थ और परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ा विवाद
प्रधानमंत्री मोदी को लेकर खड़गे की टिप्पणी और उस पर हिमंत बिस्वा सरमा की प्रतिक्रिया ने राष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।एक ओर भाजपा इसे सार्वजनिक जीवन में मर्यादा और सम्मान से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस अपने अध्यक्ष की टिप्पणी के संदर्भ को अलग तरीके से प्रस्तुत कर रही है।फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बना हुआ है। दोनों दलों के बीच जारी इस विवाद ने राजनीतिक संवाद में भाषा, व्यक्तिगत टिप्पणियों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को लेकर बहस तेज कर दी है।
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