गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को ‘नॉर्थ ईस्ट सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026 (NESFIC)-अष्टलक्ष्मी फॉर विकसित भारत’ की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य सरकार, युवा इनोवेटर्स, स्टार्टअप, उद्योग और समाज के बीच ऐसा मंच तैयार करना है, जहां पूर्वोत्तर से जुड़ी वास्तविक समस्याओं की पहचान कर तकनीक और नवाचार के जरिए व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत तकनीक और समस्याओं के समाधान के लिए देश की ‘लिविंग लैब’ के रूप में उभर सकता है।कार्यक्रम का शुभारंभ गुवाहाटी स्थित असम एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज में किया गया। इसे ‘सेवा संकल्प अभियान 2026’ के तहत आयोजित किया गया। NESFIC के जरिए युवाओं की प्रतिभा, रचनात्मकता और समस्या समाधान क्षमता को सरकारी विभागों, उद्योगों और आम नागरिकों के सामने आने वाली वास्तविक चुनौतियों से जोड़ने की योजना है।
इस पहल की मूल अवधारणा केवल नए विचार जुटाना नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसे आइडिया तलाशना है जिन्हें प्रोटोटाइप में बदला जा सके, वास्तविक परिस्थितियों में परखा जा सके और उपयोगी पाए जाने पर आगे लागू करने की दिशा में बढ़ाया जा सके। इस तरह कार्यक्रम इनोवेशन को प्रतियोगिता तक सीमित रखने के बजाय जमीनी उपयोग से जोड़ने की कोशिश करता है।NESFIC 2026 में कुल 50 चुनौतियों को शामिल करने की योजना है। इनके समाधान के लिए प्राप्त प्रस्तावों में से 150 स्टार्टअप को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। चयनित प्रतिभागियों को मेंटरिंग, समाधान विकसित करने और वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। डीप-टेक समाधान के लिए अधिकतम 40 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता का भी प्रावधान बताया गया है।मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कार्यक्रम में कहा कि पूर्वोत्तर के पास ऐसी अनेक स्थानीय चुनौतियां और अवसर हैं जिन पर तकनीक आधारित समाधान विकसित किए जा सकते हैं। उनके मुताबिक क्षेत्र के युवाओं में प्रतिभा और रचनात्मकता मौजूद है और जरूरत ऐसे संस्थागत मंच की है जो इन क्षमताओं को वास्तविक समस्याओं से जोड़ सके।
कार्यक्रम में सरकार और समाज के बीच युवाओं को एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में पेश किया गया। योजना है कि सरकारी विभागों, उद्योगों और विकास से जुड़े क्षेत्रों की समस्याओं को स्पष्ट ‘प्रॉब्लम स्टेटमेंट’ के रूप में इनोवेटर्स के सामने रखा जाए। इसके बाद स्टार्टअप, शोधकर्ता, पेशेवर, छात्र टीमें और स्वतंत्र इनोवेटर्स उनके लिए समाधान प्रस्तुत कर सकेंगे।NESFIC से जुड़ी जानकारी के मुताबिक इसमें केवल पूर्वोत्तर के इनोवेटर्स तक भागीदारी सीमित नहीं रखी गई है। देशभर के स्टार्टअप, शोधकर्ता, पेशेवर, विद्यार्थी और स्वतंत्र इनोवेटर्स पूर्वोत्तर की चुनौतियों के समाधान के लिए प्रस्ताव दे सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 25 सितंबर से शुरू की गई है।
पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को केंद्र सरकार की विकास संबंधी भाषा में ‘अष्टलक्ष्मी’ के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है। इनमें असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम शामिल हैं। केंद्र के अनुसार क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधन, जैव विविधता और दक्षिण-पूर्व एशिया से संपर्क की संभावनाएं इसे भारत की विकास रणनीति में महत्वपूर्ण बनाती हैं।NESFIC के तहत कृषि तकनीक, स्वास्थ्य, मोबिलिटी, जलवायु और पर्यावरण, पर्यटन, विनिर्माण और डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों में समाधान विकसित किए जाने की संभावनाएं हैं। पूर्वोत्तर में भौगोलिक परिस्थितियां देश के कई दूसरे हिस्सों से अलग हैं। ऐसे में परिवहन, कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, आपदा प्रबंधन और बाजार संपर्क जैसी समस्याओं के लिए स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करने पर जोर दिया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के जरिए इनोवेशन और उद्यमिता को सेवा की भावना से जोड़ने की बात कही। सरकार का उद्देश्य है कि युवा केवल समस्या की पहचान न करें, बल्कि तकनीक, शोध और उद्यमिता के माध्यम से उसका ऐसा समाधान तैयार करें जिसे जमीन पर इस्तेमाल किया जा सके।यह पहल ऐसे समय शुरू की गई है जब पूर्वोत्तर में स्टार्टअप और नई तकनीक से जुड़े इकोसिस्टम को विस्तार देने पर जोर दिया जा रहा है। सेमीकंडक्टर, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, कृषि तकनीक, ड्रोन, डिजिटल सेवाएं और अन्य उभरते क्षेत्रों में निवेश तथा कौशल विकास को क्षेत्र के नए अवसरों के रूप में देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में चयनित इनोवेटर्स को केवल वित्तीय सहायता देने के बजाय उन्हें विशेषज्ञों और उद्योग से जोड़ने की योजना भी महत्वपूर्ण है। मेंटरिंग से युवा टीमों को अपने समाधान में तकनीकी और व्यावसायिक सुधार करने का अवसर मिलेगा। वहीं वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण से यह पता लगाया जा सकेगा कि कोई समाधान व्यावहारिक रूप से कितना प्रभावी है।NESFIC का एक प्रमुख उद्देश्य इनोवेशन और सरकारी व्यवस्था के बीच मौजूद दूरी को कम करना भी है। अक्सर कॉलेजों, शोध संस्थानों और स्टार्टअप के स्तर पर विकसित अच्छे विचार वास्तविक उपयोग तक नहीं पहुंच पाते। इस चुनौती के जरिए सरकारी विभागों और इनोवेटर्स को एक साझा मंच पर लाने की कोशिश की जा रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ के अलग-अलग क्षेत्रीय कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार इन पहलों में युवाओं को अपने समुदायों की समस्याओं की पहचान करने, समाधान विकसित करने और उन्हें परीक्षण तथा क्रियान्वयन की दिशा में आगे ले जाने पर जोर दिया गया है। चयनित प्रतिभागियों को अकादमिक और औद्योगिक मेंटरिंग, लैब, परीक्षण, इनक्यूबेशन और फील्ड ट्रायल जैसी सुविधाओं से जोड़ने की व्यवस्था भी इस व्यापक मॉडल का हिस्सा है।मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने NESFIC के शुभारंभ के दौरान पूर्वोत्तर को भारत के तकनीकी और समस्या-समाधान प्रयोगों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावना जताई। उनका कहना था कि क्षेत्र की विविध परिस्थितियां नए समाधानों को विकसित और परखने का अवसर देती हैं।
Tags: