गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने विपक्षी INDIA गठबंधन की ओर से आयोजित मॉक संसद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री सरमा ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी केवल मॉक संसद में ही प्रधानमंत्री बन सकते हैं, जबकि वास्तविक संसद में नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री रहेंगे।
हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार, 3 नवंबर को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह टिप्पणी की। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी गठबंधन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है। मुख्यमंत्री ने मॉक संसद के आयोजन पर कटाक्ष करते हुए इसे कांग्रेस की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के प्रयासों के बावजूद राहुल गांधी प्रधानमंत्री नहीं बन पाए हैं। सरमा की टिप्पणी को विपक्ष की प्रतीकात्मक संसदीय गतिविधियों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग' कार्यक्रम आयोजित किया था। इसमें विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए।
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। गठबंधन के नेताओं ने चुनावी व्यवस्था की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। हालांकि ये विपक्ष के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
इस कार्यक्रम में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और कांग्रेस नेता मीरा कुमार ने भी भूमिका निभाई थी। विपक्ष ने मॉक संसद के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग प्रस्ताव पारित करने का दावा किया। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मॉक संसद में पारित प्रस्ताव संसद की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पारित वास्तविक प्रस्ताव नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए संविधान में निर्धारित औपचारिक प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होता है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विपक्ष की इस कवायद को राजनीतिक प्रदर्शन बताते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर भी कटाक्ष किया और राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की पार्टी की कोशिशों का जिक्र किया।
सरमा ने अपने बयान में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम लेते हुए कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए काफी प्रयास किए गए। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित प्रतीकात्मक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए भी तंज कसा। हिमंत सरमा के इस बयान के बाद मॉक संसद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। भाजपा नेताओं की ओर से विपक्ष के कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि INDIA गठबंधन चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव की बहस के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता है। चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक बहस जरूरी है।
दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहा है। इसी मुद्दे को लेकर 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में भी INDIA गठबंधन के नेताओं ने एक रैली आयोजित की थी। रैली में विपक्षी दलों ने कथित 'वोट चोरी' और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर अपने आरोप दोहराए थे। इस दौरान चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। विपक्ष ने इस विषय को राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनाने का प्रयास किया।
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