Guwahati गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को कहा कि सरकारी नौकरियों में चाय बागान समुदाय को तीन प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले से उनका भविष्य सुरक्षित हो गया है।
सीएम सरमा ने तर्क दिया कि चाय जनजाति समुदाय के लिए, तीन प्रतिशत आरक्षण सिर्फ एक संख्या से कहीं ज़्यादा है; यह अवसर, सम्मान और निष्पक्षता के ज़रिए सुरक्षित भविष्य है।
उन्होंने आगे कहा, "आज, कई परिवार सम्मान, अवसर और नई शुरुआत का जश्न मना रहे हैं।" हाल ही में, राज्य सरकार ने विभिन्न सरकारी पदों के लिए सफल उम्मीदवारों को कम से कम 5,500 नियुक्ति पत्र सौंपे हैं, जिसमें चाय बागान समुदाय को तीन प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस फैसले से समुदाय के लोगों को एक बड़ा अवसर मिला है, और वे राज्य सरकार की सेवा करके सम्मानजनक तरीके से अपना जीवन जी सकते हैं।
उन्होंने बताया कि जिन लोगों को नौकरी मिली है, वे सत्ताधारी सरकार की पहल से बहुत खुश हैं। खास बात यह है कि पिछले महीने, असम विधानसभा ने असम भूमि जोत पर सीमा निर्धारण (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित करके एक लंबे समय से चले आ रहे अन्याय को दूर करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया, यह कदम राज्य के इतिहास में पहली बार लगभग तीन लाख चाय बागान श्रमिकों को भूमि अधिकार प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि यह संशोधन हजारों चाय बागान परिवारों को सम्मान, स्थिरता और लंबे समय से लंबित सुरक्षा प्रदान करेगा, जो पीढ़ियों से उस भूमि के कानूनी स्वामित्व के बिना रह रहे हैं जिस पर वे रहते हैं।
संशोधित प्रावधानों के तहत, श्रमिकों को उन भूखंडों के लिए भूमि पट्टे जारी किए जाएंगे जिन पर वे वर्तमान में रहते हैं, औपचारिक रूप से उनके आश्रय और आजीविका के अधिकार को मान्यता दी जाएगी। लाभार्थियों के हितों की रक्षा करने और संकट में बिक्री या शोषण को रोकने के लिए, मुख्यमंत्री ने कहा कि आवंटित भूमि को 20 साल की अवधि के लिए बेचा नहीं जा सकता है। इस लॉक-इन अवधि के बाद भी, भूमि का कोई भी हस्तांतरण केवल उसी समुदाय के भीतर ही अनुमत होगा, यह सुनिश्चित करते हुए कि सुधार के लाभ चाय बागान श्रमिकों के पास ही रहें। चाय समुदाय के सामाजिक उत्थान के लिए समानांतर उपायों पर प्रकाश डालते हुए, सीएम सरमा ने समुदाय के छात्रों के लिए एमबीबीएस सीटों के आरक्षण को एक और ऐतिहासिक हस्तक्षेप बताया।