युवाओं के रोजगार पर असम सरकार का फोकस विभागीय योजनाओं की हुई बड़ी समीक्षा
गुवाहाटी। असम में युवाओं के लिए कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में बुधवार को जनता भवन में समीक्षा बैठकों की एक श्रृंखला आयोजित की गई। कौशल, रोजगार और उद्यमिता मंत्री बिस्वजीत दैमारी की अध्यक्षता में मंत्री कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में हुई इन बैठकों में विभाग की मौजूदा योजनाओं, रोजगार सेवाओं, प्रशिक्षण व्यवस्था, विभिन्न संगठनों के साथ चल रहे समझौता ज्ञापनों और भविष्य की साझेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।मंत्रालय के जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार पहली बैठक कौशल, रोजगार और उद्यमिता विभाग के अंतर्गत आने वाले असम के रोजगार एवं शिल्पकार प्रशिक्षण निदेशालय यानी DECT के रोजगार विंग की समीक्षा पर केंद्रित रही। बैठक में रोजगार विंग के मौजूदा कामकाज, उसकी भूमिका और युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए अपनाई जा रही व्यवस्था पर चर्चा हुई।इस दौरान पूर्व खेल एवं युवा कल्याण विभाग के विभाजन के बाद उत्पन्न प्रशासनिक बदलाव और विभाग के पुनर्गठन से जुड़े तौर-तरीकों पर भी विचार किया गया। अधिकारियों ने अलग-अलग जिम्मेदारियों के बेहतर समन्वय और नई विभागीय व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
युवा सशक्तिकरण के लिए एकीकृत व्यवस्था पर जोर
बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा युवा सशक्तिकरण के लिए एक एकीकृत ढांचा विकसित करने पर केंद्रित रहा। इस संबंध में राष्ट्रीय कैडेट कोर यानी NCC, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स और असम युवा आयोग के प्रतिनिधियों के साथ भी विचार-विमर्श किया गया।इस पहल का उद्देश्य युवाओं से जुड़े अलग-अलग संगठनों और सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना है। कौशल प्रशिक्षण, रोजगार, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक भागीदारी और व्यक्तित्व विकास जैसे क्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़कर युवाओं के लिए अधिक प्रभावी व्यवस्था तैयार करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।सरकार का जोर इस बात पर है कि युवाओं को केवल रोजगार के लिए तैयार करने तक व्यवस्था सीमित न रहे बल्कि उनमें नेतृत्व, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और उद्यमिता से जुड़ी क्षमताओं को भी विकसित किया जाए।NCC और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स जैसे संगठन लंबे समय से युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व और सामाजिक सेवा की भावना विकसित करने के क्षेत्र में काम करते रहे हैं। वहीं असम युवा आयोग राज्य के युवाओं से जुड़े मुद्दों और उनके विकास के लिए नीतिगत स्तर पर भूमिका निभाता है। ऐसे में इन संस्थाओं के बीच समन्वय को युवा सशक्तिकरण के व्यापक लक्ष्य से जोड़ने पर मंथन किया गया।
DECT के कामकाज की हुई समीक्षा
रोजगार एवं शिल्पकार प्रशिक्षण निदेशालय राज्य में रोजगार और कौशल प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बैठक में इसके रोजगार विंग की गतिविधियों की समीक्षा के दौरान इस बात पर विचार किया गया कि बदलते रोजगार बाजार के अनुसार युवाओं को किस तरह बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।आज रोजगार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। परंपरागत नौकरियों के साथ डिजिटल, तकनीकी और सेवा क्षेत्र में नए अवसर सामने आ रहे हैं। ऐसे में कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बनाए रखना जरूरी है।बैठक में इस दिशा में विभाग की मौजूदा कार्यप्रणाली और भविष्य में किए जा सकने वाले बदलावों पर विचार किया गया।
चल रहे MoU की स्थिति पर चर्चा
इसके बाद आयोजित बैठकों में कौशल, रोजगार और उद्यमिता विभाग के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। इनमें DECT की ओर से विभिन्न संगठनों के साथ किए गए समझौता ज्ञापनों यानी MoUs की वर्तमान स्थिति प्रमुख विषय रही।इन समझौतों के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण, रोजगार, उद्योगों से संपर्क और युवाओं को व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराने जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं विकसित की जाती हैं। बैठक में यह समझने का प्रयास किया गया कि मौजूदा साझेदारियां कितनी प्रभावी हैं और उनके जरिए निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में कितनी प्रगति हुई है।मंत्री ने विभागीय अधिकारियों के साथ इस बात पर भी चर्चा की कि भविष्य में किन नए क्षेत्रों और संगठनों के साथ साझेदारी की जा सकती है।
नई साझेदारियों की संभावनाओं पर मंथन
कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में उद्योगों तथा प्रशिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत संपर्क महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि प्रशिक्षण कार्यक्रम सीधे बाजार और उद्योग की जरूरतों से जुड़े हों तो प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं के लिए रोजगार हासिल करने की संभावना बढ़ सकती है।इसी को देखते हुए बैठक में नए दृष्टिकोण अपनाने और अलग-अलग संगठनों के साथ सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया गया। इसके तहत रोजगार के बदलते स्वरूप और उद्योगों की मांग के अनुसार प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।उद्यमिता भी विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला बनाने के बजाय उन्हें स्वरोजगार और अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक कौशल उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
रोजगार सेवाओं को प्रभावी बनाने पर फोकस
समीक्षा बैठकों में रोजगार से संबंधित सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। युवाओं तक नौकरी से जुड़ी सूचनाएं समय पर पहुंचाना, प्रशिक्षण और रोजगार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा नियोक्ताओं और नौकरी तलाश रहे युवाओं को एक मंच पर लाना इस व्यवस्था के महत्वपूर्ण पहलू हैं।विभाग की कोशिश है कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को रोजगार के उपलब्ध अवसरों के बारे में जानकारी मिले और उद्योगों को भी उनकी आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।इसके लिए डिजिटल तकनीक और आधुनिक रोजगार सेवाओं के उपयोग की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हैं। कौशल प्रशिक्षण के साथ करियर मार्गदर्शन और रोजगार से जुड़ी जानकारी युवाओं के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
विभागीय पुनर्गठन पर भी नजर
पूर्व खेल और युवा कल्याण विभाग के विभाजन के बाद प्रशासनिक जिम्मेदारियों के पुनर्गठन पर हुई चर्चा को भी बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। नई व्यवस्था में अलग-अलग योजनाओं और संस्थाओं की भूमिका स्पष्ट करने तथा उनके बीच समन्वय स्थापित करने की जरूरत पर जोर दिया गया।सरकार चाहती है कि विभागीय बदलाव का असर योजनाओं के क्रियान्वयन पर न पड़े और युवाओं से जुड़ी गतिविधियां अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ें।बुधवार को हुई समीक्षा बैठकों में कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता और युवा सशक्तिकरण को एक व्यापक व्यवस्था के तहत आगे बढ़ाने की दिशा में मंथन किया गया। DECT के रोजगार विंग से लेकर मौजूदा MoU और नई साझेदारियों तक विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई।आने वाले समय में इन बैठकों के आधार पर विभाग अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों में आवश्यक बदलाव कर सकता है। सरकार का प्रमुख लक्ष्य युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण, रोजगार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने के साथ ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें अलग-अलग सरकारी विभागों और युवा संगठनों के बीच बेहतर समन्वय हो।