असम सरकार 1983 दंगा आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा सदस्यों के बीच वितरित करेगी, CM हिमंता बिस्वा सरमा ने किया ऐलान

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा

Update: 2025-11-13 16:27 GMT
Assam असम: मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को ऐलान किया कि राज्य सरकार 1983 के असम दंगों के दौरान बनाई गई त्रिभुवन प्रसाद तिवारी आयोग की रिपोर्ट अब विधानसभा सदस्यों के बीच वितरित की जाएगी और इसकी प्रतियां असम विधानसभा पुस्तकालय में रखी जाएंगी। सीएम सरमा ने बताया कि असम ने 1983 में अभूतपूर्व हिंसा का सामना किया, जिसमें 2,000 से अधिक लोग मारे गए और लगभग 3 लाख लोग महीनों तक राहत शिविरों में जीवन बिताने के लिए मजबूर हुए। उस समय की सरकार ने इस घटना की जांच के लिए त्रिभुवन प्रसाद तिवारी की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था, लेकिन उस आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य कैबिनेट ने हाल ही में यह निर्णय लिया है कि रिपोर्ट को आगामी विधानसभा सत्र में सदस्यों के बीच वितरित किया जाएगा, ताकि विधायकों को 1983 की घटनाओं और इसके प्रभावों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सके। इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट की प्रतियां असम विधानसभा पुस्तकालय में उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे कोई भी सदस्य आवश्यकतानुसार इसे देख सके।  सीएम सरमा ने इस अवसर पर कहा, “1983 का असम दंगा राज्य के इतिहास में एक काला अध्याय था। राज्य सरकार अब इसे पारदर्शिता और न्याय के दृष्टिकोण से उजागर करना चाहती है। यह कदम हमें इतिहास से सीख लेने और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने में मदद करेगा।”
1983 के दंगों के दौरान हजारों लोगों ने अपने घरों को छोड़ना पड़ा और उन्हें राहत शिविरों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। कई परिवार आज भी उस त्रासदी की यादों के साथ जी रहे हैं। इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का निर्णय उन परिवारों और पीड़ितों के लिए सांत्वना और न्याय का प्रतीक माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आशा जताई कि रिपोर्ट के वितरण और उपलब्धता से विधानसभा में सभी राजनीतिक दल और सदस्य घटनाओं की गंभीरता को समझेंगे और भविष्य में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में और कदम उठाए जाएंगे।
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