नई दिल्ली: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के शोधकर्ताओं ने मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली से प्रेरित एक नई तकनीक विकसित की है, जो भविष्य में कम ऊर्जा खर्च करने वाले विजन सिस्टम के निर्माण में मदद कर सकती है। इस तकनीक का उद्देश्य कैमरे से प्राप्त दृश्य जानकारी को अधिक कुशलता से संसाधित करना और परंपरागत कंप्यूटिंग प्रणालियों की तुलना में ऊर्जा की जरूरत कम करना है।
शोधकर्ताओं ने ऐसा उपकरण विकसित करने पर काम किया है, जो मस्तिष्क के न्यूरॉन्स और सिनैप्स की तरह जानकारी को संसाधित कर सके। इस प्रकार की तकनीक को न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग कहा जाता है। इसका इस्तेमाल भविष्य में स्मार्ट कैमरों, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विजन सिस्टम में किया जा सकता है।
IIT गुवाहाटी और IIT खड़गपुर ने मिलकर किया शोध
इस तकनीक को IIT गुवाहाटी और IIT खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। शोध दल ने प्रकाश के प्रति संवेदनशील एक बेहद पतला उपकरण बनाया है, जो दृश्य जानकारी को पहचानने, याद रखने और संसाधित करने की क्षमता प्रदर्शित करता है।
IIT गुवाहाटी के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर पी.के. गिरी ने शोध का नेतृत्व किया। इसमें संजय सुर रॉय, डॉ. संजू नंदी, देबब्रत साहू, गरिमा चौधरी और प्रोफेसर एम. मेय्यप्पन सहित अन्य शोधकर्ता शामिल रहे। IIT खड़गपुर से सस्वत गोस्वामी और प्रोफेसर चंद्रशेखर तिवारी ने योगदान दिया।
500 गुना कम ऊर्जा की जरूरत
इस उपकरण की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ऊर्जा दक्षता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, प्रयोगशाला परीक्षणों में इसने पारंपरिक MXene आधारित उपकरणों की तुलना में लगभग 500 गुना कम ऊर्जा की खपत की।
सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विजन सिस्टम में कैमरा तस्वीरें लेता है, जिसके बाद जानकारी को अलग प्रोसेसर तक पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया में अतिरिक्त ऊर्जा खर्च होती है।नया उपकरण दृश्य जानकारी को पहचानने, संग्रहित करने और संसाधित करने के कार्य एक ही प्लेटफॉर्म पर कर सकता है। इससे अलग-अलग घटकों के बीच डेटा भेजने की आवश्यकता कम हो सकती है।
कैसे काम करता है दिमाग से प्रेरित डिवाइस?
मानव मस्तिष्क में न्यूरॉन्स और उनके बीच मौजूद सिनैप्स सूचनाओं को संसाधित करने तथा याद रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शोधकर्ताओं ने इसी प्रक्रिया से प्रेरणा लेकर एक कृत्रिम सिनैप्स विकसित किया है। यह प्रकाश पड़ने पर विद्युत प्रतिक्रिया देता है और प्रकाश बंद होने के बाद भी कुछ समय तक उस प्रतिक्रिया को बनाए रख सकता है। उपकरण में MXene नामक द्विआयामी पदार्थ और P3HT नामक कार्बनिक सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल किया गया है। दोनों पदार्थों के संपर्क में प्रकाश के कारण उत्पन्न विद्युत आवेश अलग हो जाते हैं, जिससे स्मृति जैसी विशेषता पैदा होती है।
दूसरी बार प्रकाश पड़ने पर 180% मजबूत प्रतिक्रिया
प्रयोग के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि दूसरी बार प्रकाश का संकेत देने पर उपकरण की प्रतिक्रिया पहली बार की तुलना में 180 प्रतिशत अधिक मजबूत थी। यह व्यवहार मस्तिष्क में बार-बार मिलने वाले संकेतों के प्रति कुछ तंत्रिका संपर्कों की प्रतिक्रिया मजबूत होने जैसा है।
इस विशेषता से ऐसे उपकरण विकसित करने में मदद मिल सकती है, जो दृश्य संकेतों को केवल रिकॉर्ड न करें, बल्कि उनसे संबंधित जानकारी को कुछ समय तक बनाए भी रखें।
चेहरा पहचानने में 90% सटीकता
शोधकर्ताओं ने इस तकनीक का परीक्षण चेहरा पहचानने और सड़क यातायात के दृश्यों का विश्लेषण करने जैसे कार्यों में भी किया। परीक्षण में उपकरण आधारित प्रणाली ने चेहरे की पहचान में 90 प्रतिशत और यातायात दृश्यों के अलग-अलग हिस्सों की पहचान में 85 प्रतिशत सटीकता हासिल की। ये परिणाम प्रयोगात्मक परिस्थितियों के हैं। वास्तविक दुनिया में व्यापक उपयोग से पहले तकनीक का और परीक्षण करना आवश्यक होगा।
रोबोट और स्मार्ट कैमरों में हो सकता है इस्तेमाल
वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक स्मार्ट कैमरों, रोबोटिक विजन, चेहरे की पहचान और बुद्धिमान इमेज प्रोसेसिंग सिस्टम में उपयोगी हो सकती है।
कम ऊर्जा की आवश्यकता होने से ऐसी तकनीक बैटरी से चलने वाले उपकरणों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। यह फिलहाल शोध स्तर की उपलब्धि है। इसके आधार पर तैयार व्यावसायिक कैमरा या रोबोट बाजार में उपलब्ध होने की घोषणा नहीं की गई है। यह शोध भविष्य में ऐसी कंप्यूटिंग प्रणालियां विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो मानव मस्तिष्क की तरह जानकारी को कुशलता से संसाधित कर सकें।
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