गुवाहाटी : असम में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य में जारी बाढ़ से पिछले 24 घंटों में चार और लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 66 हो गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की ओर से जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
ASDMA के अनुसार, शनिवार को जारी आपदा रिपोर्टिंग और सूचना प्रबंधन प्रणाली (DRIMS) की रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य में बाढ़ से संबंधित कुल मौतों का आंकड़ा 66 तक पहुंच गया है। इसमें बाढ़ के कारण हुई 65 सामान्य मौतें और शहरी बाढ़ से जुड़ी एक मौत शामिल है।
हाल में हुई चार मौतों में तीन मौतें शिवसागर जिले में हुईं, जबकि एक व्यक्ति की जान चराइदेव जिले में चली गई। लगातार बारिश और नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ का संकट बना हुआ है।
25 जुलाई तक राज्य के 10 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें गोलाघाट, चराइदेव, कामरूप, होजई, डिब्रूगढ़, शिवसागर, जोरहाट, सोनितपुर, कामरूप (मेट्रो) और नागांव शामिल हैं। इन जिलों में 6.54 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं।
बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शिवसागर सबसे ऊपर है। यहां 2,90,777 लोग प्रभावित हुए हैं। इसके बाद चराइदेव जिले में 1,88,404 लोग और जोरहाट जिले में 1,31,948 लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं।
प्रभावित इलाकों में प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं। जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को सहायता उपलब्ध कराने में जुटी हुई हैं।
बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। लोगों को आवागमन, पेयजल, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई निचले इलाकों में पानी भर जाने से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविरों की व्यवस्था की गई है। इन शिविरों में रहने वाले लोगों को भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
असम में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आती है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण राज्य के कई जिले प्रभावित होते हैं। इस बार भी लगातार बारिश के कारण कई नदियां उफान पर हैं।
प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है। साथ ही, आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने को कहा गया है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुधन को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। ग्रामीण इलाकों में लोगों के साथ-साथ मवेशियों को बचाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। कई स्थानों पर राहत दल नावों के जरिए प्रभावित लोगों तक पहुंच रहे हैं।
ASDMA लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और प्रभावित जिलों से जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जा रहा है।
मौसम विभाग की ओर से आने वाले दिनों में बारिश की संभावना को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो कुछ और इलाकों में बाढ़ की स्थिति बिगड़ सकती है।
राज्य में बाढ़ से अब तक हुई मौतों और प्रभावित लोगों की संख्या ने एक बार फिर असम में आपदा प्रबंधन की चुनौती को सामने ला दिया है। प्रशासन की कोशिश है कि प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जाए और किसी भी तरह के बड़े नुकसान को रोका जा सके।
फिलहाल असम के कई जिलों में बाढ़ का असर बना हुआ है और राहत एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं। आने वाले दिनों में बारिश और नदियों के जलस्तर के आधार पर राज्य में बाढ़ की स्थिति का आकलन किया जाएगा।