NERIST में महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता पर कार्यशाला आयोजित
NERIST की पहल, कार्यशाला में हुई अहम चर्चा
नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NERIST) में महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता को लेकर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और संस्थान से जुड़े लोगों के बीच लैंगिक समानता, महिलाओं के अधिकार और समाज में महिलाओं की भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना रहा।
कार्यशाला के दौरान महिला सशक्तिकरण को केवल महिलाओं से जुड़ा विषय न मानकर व्यापक सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति तभी संभव है, जब महिलाओं और पुरुषों को शिक्षा, रोजगार, निर्णय लेने और नेतृत्व के समान अवसर उपलब्ध हों।
कार्यक्रम में लैंगिक समानता से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा की गई। इसमें शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर, कार्यस्थल पर सम्मानजनक वातावरण, महिलाओं की सुरक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और नेतृत्व में उनकी भागीदारी जैसे विषय शामिल रहे। प्रतिभागियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि लैंगिक भेदभाव केवल व्यक्तिगत स्तर की समस्या नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव परिवार, संस्थान और पूरे समाज पर पड़ता है।
कार्यशाला में महिला सशक्तिकरण के लिए शिक्षा की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद करती है। तकनीकी और उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की भागीदारी बढ़ाना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।
NERIST जैसे तकनीकी संस्थान में इस तरह की कार्यशाला का आयोजन विद्यार्थियों के बीच संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। तकनीकी शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी और समानता के मूल्यों को समझना भी छात्रों के समग्र विकास का हिस्सा है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को लैंगिक पूर्वाग्रहों को पहचानने और उन्हें दूर करने के तरीकों के बारे में भी जानकारी दी गई।
वक्ताओं ने कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संस्थानों को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जहां किसी भी प्रकार के भेदभाव या उत्पीड़न की स्थिति में शिकायत और सहायता के स्पष्ट माध्यम उपलब्ध हों। इसके लिए संस्थागत जागरूकता और प्रभावी नीतियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
महिला सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू आर्थिक स्वतंत्रता भी है। कार्यशाला में इस बात पर चर्चा की गई कि महिलाओं को रोजगार, उद्यमिता और कौशल विकास के समान अवसर मिलने से उनकी निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। इसके अलावा परिवार और समाज में महिलाओं की भूमिका को लेकर मौजूद पारंपरिक धारणाओं में बदलाव की जरूरत पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों की भागीदारी भी रही और लैंगिक समानता से जुड़े सवालों पर संवाद किया गया। ऐसे संवाद युवाओं को सामाजिक मुद्दों को समझने और अपने आसपास समानता आधारित वातावरण बनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
कार्यशाला का व्यापक संदेश यही रहा कि महिला सशक्तिकरण केवल महिलाओं के लिए अवसर बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसमें पुरुषों और महिलाओं दोनों की भागीदारी जरूरी है। परिवार, शैक्षणिक संस्थान, कार्यस्थल और समाज के अन्य हिस्सों में समानता की सोच को बढ़ावा देकर ही स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।
NERIST में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से संस्थान में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर चर्चा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया। कार्यशाला में सामने आए विचार विद्यार्थियों और संस्थान के सदस्यों को समान अवसर, सम्मान और समावेशिता के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करने वाले रहे।