ईटानगर: अरुणाचल क्रिश्चियन फ़ोरम (ACF) ने आरोप लगाया है कि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) का डिजिटल बैंकिंग सॉफ़्टवेयर, अकाउंट खोलने और KYC अपडेट करने के दौरान इस धर्म को मानने वालों को 'शेड्यूल्ड ट्राइब' (ST) का विकल्प चुनने की इजाज़त नहीं दे रहा था, और अपना धर्म चुनने पर उन्हें अपने-आप 'जनरल' कैटेगरी में डाल दिया जा रहा था।
इसने सरकारी बैंक से 15 दिनों के अंदर ज़रूरी तकनीकी सुधार करने की मांग की है और ऐसा न होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
5 अक्टूबर को ईटानगर में SBI के रीजनल मैनेजर को दिए गए एक औपचारिक पत्र में, राज्य की मुख्य ईसाई संस्था ने दावा किया कि धर्म के तौर पर 'क्रिश्चियन' चुनने पर सॉफ़्टवेयर 'शेड्यूल्ड ट्राइब' का विकल्प बंद कर देता है और आवेदकों को 'जनरल' कैटेगरी में डाल देता है।
सॉफ़्टवेयर के इस व्यवहार को "संभावित रूप से भेदभावपूर्ण" बताते हुए, अरुणाचल क्रिश्चियन फ़ोरम (ACF) ने ज़ोर देकर कहा कि संविधान (शेड्यूल्ड ट्राइब्स) आदेश, 1950 के तहत, अरुणाचल प्रदेश में आदिवासी दर्जा धार्मिक जुड़ाव पर निर्भर नहीं करता है।
इसने कहा, "स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के पास किसी ऐसे आदिवासी ईसाई ग्राहक का नाम सूची से हटाने का अधिकार नहीं है जिसके पास वैध ST सर्टिफ़िकेट हो। SBI सिर्फ़ उनके बताए गए धर्म के आधार पर किसी आदिवासी ईसाई को अपने-आप 'जनरल' कैटेगरी में नहीं डाल सकता।"
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