ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट क्षमता वाली सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) को लेकर विरोध तेज हो गया है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को सियांग जिले के गेकू के पास डाइट-डाइम इलाके में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस दौरान स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। घटना में कम से कम चार महिलाएं घायल हो गईं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। झड़प के दौरान पुलिस के वाहनों में तोड़फोड़ और सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना के विरोध में शुक्रवार को 12 घंटे के बंद का आह्वान किया गया था। इसी दौरान सुबह करीब सात बजे बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी डाइट-डाइम स्थित 65 ब्रिज के पास एकत्रित हुए। देखते ही देखते प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस का आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने की कोशिश की। इसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी।
150 से 200 प्रदर्शनकारियों ने किया विरोध
सियांग जिले के पुलिस अधीक्षक कामदम सिखोम के अनुसार, अपर सियांग जिले के गेकू और कोमकार सहित आसपास के इलाकों से लगभग 150 से 200 प्रदर्शनकारी डाइट-डाइम पहुंचे थे।पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के पास धारदार हथियार, लाठियां, गुलेल और अन्य सामान मौजूद था। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की ओर से लगाए गए बैरिकेड हटाने की कोशिश की और सुरक्षा बलों पर पथराव किया।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आवश्यक चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद स्थिति तनावपूर्ण होने पर कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कार्रवाई की गई।हालांकि, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि सियांग जिले के अन्य कई स्थानों पर बंद शांतिपूर्ण रहा।
आंसू गैस से चार महिलाएं घायल
डाइट-डाइम में हुई झड़प के दौरान आंसू गैस के इस्तेमाल से कम से कम चार महिलाओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है।बताया जा रहा है कि आंसू गैस के संपर्क में आने के बाद कुछ महिलाओं को सांस लेने में परेशानी हुई। इसके बाद उन्हें गेकू अस्पताल पहुंचाया गया।
कुछ महिलाओं को आंसू गैस के गोले सीधे लगने की भी खबर है। हालांकि, घायल महिलाओं की विस्तृत चिकित्सकीय स्थिति की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।झड़प के दौरान कुछ वाहनों में तोड़फोड़ की भी सूचना है। पुलिस और प्रशासन घटना से जुड़े परिस्थितियों की समीक्षा कर रहे हैं।
क्यों हो रहा 11,200 मेगावाट परियोजना का विरोध?
अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट लंबे समय से विवादों में है। यह परियोजना सियांग नदी पर विकसित करने की योजना है, जिसकी प्रस्तावित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 11,200 मेगावाट बताई गई है।
सरकार इस परियोजना को ऊर्जा सुरक्षा और जल संसाधन प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानती है।वहीं, स्थानीय आदिवासी समुदायों को आशंका है कि विशाल बांध बनने से उनके गांव, कृषि भूमि, जंगल और पारंपरिक आजीविका प्रभावित हो सकती है।विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि परियोजना से जुड़े सर्वेक्षण और निर्माण संबंधी फैसले स्थानीय लोगों की सहमति तथा उनकी चिंताओं का समाधान किए बिना आगे नहीं बढ़ाए जाने चाहिए।
आदिवासी समुदायों को विस्थापन की चिंता
इस परियोजना का सबसे ज्यादा विरोध स्थानीय आदि समुदाय के लोग कर रहे हैं।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बांध बनने से कई गांवों के जलमग्न होने का खतरा है। इसके अलावा कृषि भूमि, जंगलों और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है।परियोजना के विरोधियों के अनुसार, नदी केवल जल और बिजली का स्रोत नहीं है, बल्कि स्थानीय समुदायों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी है।इसी कारण ग्रामीण लंबे समय से परियोजना के प्रारंभिक व्यवहार्यता अध्ययन और सर्वेक्षण
गतिविधियों
का विरोध कर रहे हैं।
10 प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग
शुक्रवार को बुलाए गए बंद का उद्देश्य केवल परियोजना का विरोध करना नहीं था। प्रदर्शनकारी संगठनों ने गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए 10 कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग भी उठाई है।आदि बाने केबांग यूनाइटेड, सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट प्रभावित क्षेत्र युवा संघ, सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम यूथ विंग और आदि गालो वेलफेयर सोसायटी सहित कई संगठनों ने बंद का समर्थन किया।इन संगठनों की मांग है कि गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए और बांध प्रभावित क्षेत्रों में प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट से संबंधित सभी गतिविधियां बंद की जाएं।इसके अलावा निलंबित ग्राम प्रधानों की बहाली और क्षेत्र में तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की मांग भी की गई है।
तीन जिलों में बंद का असर
12 घंटे के बंद का असर अरुणाचल प्रदेश के सियांग और अपर सियांग जिलों के साथ पूर्वी सियांग के कुछ हिस्सों में भी दिखाई दिया।कई स्थानों पर दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में आवाजाही कम देखने को मिली।हालांकि, कुछ संगठनों ने बंद से दूरी भी बनाई। पूर्वी सियांग प्रशासन ने बंद को लेकर आपत्ति जताई थी।
इसके बाद आयोजकों ने पूर्वी सियांग जिले में बंद वापस लेने पर सहमति जताई। इसके बावजूद कुछ इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हुईं।स्कूलों, विश्वविद्यालयों और चिकित्सा संस्थानों में अधिकांश स्थानों पर सामान्य कामकाज जारी रहने की जानकारी सामने आई है।
पहले भी हो चुकी हैं हिंसक झड़पें
सियांग परियोजना का विरोध पिछले कई महीनों से जारी है। इससे पहले सितंबर और अक्टूबर में भी प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आई थीं।अक्टूबर की शुरुआत में प्रदर्शनकारियों ने परियोजना के सर्वेक्षण कार्यों का विरोध करते हुए कई स्थानों पर प्रदर्शन किया था।
कुछ घटनाओं में सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के आवास पर तोड़फोड़ के आरोप भी लगे थे।वहीं, प्रदर्शनकारी संगठनों ने सुरक्षा बलों पर अत्यधिक बल प्रयोग करने के आरोप लगाए थे।इन्हीं घटनाओं के बाद प्रशासन ने कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए थे।
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ी दूरी
राज्य सरकार का कहना है कि परियोजना को लेकर अभी तकनीकी और व्यवहार्यता संबंधी अध्ययन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।सरकार ने पहले भी संकेत दिया है कि अंतिम निर्माण संबंधी निर्णय आवश्यक तकनीकी, कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद ही लिया जाएगा।दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी संगठन सर्वेक्षण गतिविधियों को ही रोकने की मांग कर रहे हैं।उनका कहना है कि जब स्थानीय समुदाय परियोजना से जुड़े संभावित खतरों को लेकर आशंकित हैं, तो सरकार को पहले उनकी चिंताओं को दूर करना चाहिए।
शांति बहाली प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
डाइट-डाइम में हुई ताजा झड़प के बाद सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।एक ओर सरकार के सामने बड़ी जलविद्युत परियोजना से जुड़ी योजनाएं हैं, तो दूसरी ओर स्थानीय लोगों की भूमि, आजीविका और पर्यावरण संरक्षण की चिंताएं हैं।ऐसी स्थिति में सरकार और प्रभावित समुदायों के बीच संवाद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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