अरुणाचल प्रदेश: मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 31 अक्टूबर को 'अरुणाचल बौद्ध परिसंघ' के गठन की घोषणा की। इसका उद्देश्य राज्य के विभिन्न बौद्ध समुदायों को एक साथ लाना और उनकी धार्मिक परंपराओं को मजबूत करना है। यह घोषणा तवांग मठ में भगवान शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान की गई। इन अवशेषों की 13 साल बाद राज्य में वापसी हुई है।
खांडू ने बताया कि यह प्रस्तावित परिसंघ महायान और थेरवाद परंपराओं का पालन करने वाले बौद्ध समुदायों के लिए एक साझा मंच प्रदान करेगा और 'अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ' (IBC) से जुड़ने का प्रयास करेगा।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय दोनों परंपराओं के वरिष्ठ नेताओं और प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। इनमें उपमुख्यमंत्री चौना मेन और नामसाई के विधायक जिग्नू नामचूम भी शामिल थे।
नामसाई परियत्ति शासन बौद्ध विहार के मुख्य भिक्षु, आदरणीय अगाधम्मा को इस परिसंघ का पहला अध्यक्ष चुना गया है। वहीं, 'कार्मिक और आध्यात्मिक मामलों के विभाग' (DoKAA) के निदेशक थुप्तेन काल्डेन इसके महासचिव होंगे।
राज्य में बौद्ध धर्म की विविधता पर प्रकाश डालते हुए खांडू ने बताया कि महायान समुदाय तवांग, पश्चिम कामेंग, मेचुका, टुटिंग, तक्सिंग क्षेत्र और अंजाव में मौजूद हैं, जबकि थेरवाद समुदाय मुख्य रूप से नामसाई और चांगलांग में रहते हैं।
उन्होंने कहा कि यह परिसंघ विभिन्न बौद्ध समुदायों और संस्थानों को एक साझा मंच पर लाएगा, जिससे उनकी धार्मिक प्रथाओं और परंपराओं को संरक्षित करने और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
यह घोषणा तवांग मठ (जिसे 'गादेन नामग्याल ल्हात्से मठ' के नाम से भी जाना जाता है) में भगवान शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी के उद्घाटन के समय की गई। ये अवशेष 21 नवंबर तक तीन जिलों में प्रदर्शित किए जाएंगे।
यह प्रदर्शनी 31 अक्टूबर से 7 नवंबर तक तवांग में, 8 से 14 नवंबर तक पश्चिम कामेंग में और 14 से 21 नवंबर तक नामसाई में आयोजित की जाएगी, जिससे पूरे राज्य के श्रद्धालु इन अवशेषों के दर्शन कर सकेंगे और अपनी श्रद्धा अर्पित कर सकेंगे। खांडू ने इस प्रदर्शनी को मंजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, संस्कृति मंत्रालय तथा राष्ट्रीय संग्रहालय के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
वैश्विक अनिश्चितता के दौर में बुद्ध की शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए, मुख्यमंत्री ने लोगों से शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए बुद्ध के ज्ञान, करुणा और सह-अस्तित्व से प्रेरणा लेने का आग्रह किया।
उन्होंने इस अवसर पर शुभकामनाओं और आशीर्वाद के लिए 14वें दलाई लामा के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उनका संदेश इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन के महासचिव, पूज्य शार्टसे खेनसुर जंगचुप चोडेन रिम्पोछे द्वारा पढ़कर सुनाया गया।
खांडू ने प्रधानमंत्री मोदी का एक संदेश भी पढ़कर सुनाया, जिसमें उन्होंने इस प्रदर्शनी को अत्यधिक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाला आयोजन बताया। मोदी ने कहा कि बुद्ध की शिक्षाओं ने दो सहस्राब्दियों से अधिक समय से मानवता को शांति और करुणा की ओर प्रेरित किया है और ये दुनिया के साथ भारत के सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करना जारी रखे हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने बौद्ध विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला, जिनमें बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर जैसे स्थलों का विकास, पिपरहवा के अवशेषों की भारत वापसी और पाली भाषा को शास्त्रीय भाषा (क्लासिकल लैंग्वेज) का दर्जा दिया जाना शामिल है।
खांडू ने पूर्वोत्तर में बौद्ध स्थलों के विकास के लिए केंद्रीय बजट में की गई घोषणा का भी स्वागत किया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय पर्यटन मंत्री के साथ चर्चा के बाद पर्यटन मंत्रालय एक नीतिगत ढांचे पर काम कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल से पूरे अरुणाचल प्रदेश में मौजूद विरासत स्थलों को लाभ मिलेगा।
उद्घाटन समारोह में शेखावत, लोकसभा सांसद तापिर गाओ, विभिन्न विधायक, मुख्य सचिव मनीष गुप्ता, तथा संस्कृति मंत्रालय, राष्ट्रीय संग्रहालय और इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन के प्रतिनिधियों सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।