डॉ. जोरम अनिया बने NITI आयोग के पूर्णकालिक सदस्य, पूर्वोत्तर को मिला बड़ा प्रतिनिधित्व

Update: 2026-05-02 16:34 GMT
Andhra Pradesh आंध्र प्रदेश: केंद्र सरकार ने 2 मई को प्रसिद्ध शिक्षाविद डॉ. जोरम अनिया को राष्ट्रीय नीति निर्माण संस्था नीति आयोग (NITI Aayog) का पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया है। इस नियुक्ति को अरुणाचल प्रदेश और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
डॉ. जोरम अनिया को नीति आयोग में शामिल किए जाने को क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। वे अरुणाचल प्रदेश की एक प्रमुख बौद्धिक और शैक्षणिक आवाज माने जाते हैं, जिन्होंने शिक्षा और नीति अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
नीति आयोग देश का प्रमुख नीति-निर्धारक संस्थान है, जो विकास योजनाओं और आर्थिक नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस संस्था के अध्यक्ष भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, डॉ. अनिया की नियुक्ति से पूर्वोत्तर भारत के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक मुद्दों को राष्ट्रीय नीति स्तर पर अधिक मजबूती से प्रस्तुत किया जा सकेगा। इससे क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों और संभावनाओं को नीति निर्माण में बेहतर तरीके से शामिल करने की उम्मीद है।
डॉ. जोरम अनिया लंबे समय से शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहे हैं। उन्हें अकादमिक जगत में एक विचारशील और गहन शोधकर्ता के रूप में जाना जाता है। उनकी नियुक्ति को विशेषज्ञता आधारित नीति निर्माण की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
पूर्वोत्तर राज्यों के कई नेताओं और बुद्धिजीवियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे क्षेत्र की समस्याओं को केंद्र स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा और विकास योजनाओं में संतुलन आएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, नीति आयोग में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व बढ़ने से समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है। डॉ. अनिया की नियुक्ति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखी जा रही है।
सरकारी स्तर पर यह भी माना जा रहा है कि इस नियुक्ति से पूर्वोत्तर भारत के शिक्षा, बुनियादी ढांचे और सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दों पर नए दृष्टिकोण सामने आएंगे।
कुल मिलाकर, डॉ. जोरम अनिया की नीति आयोग में नियुक्ति न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत के लिए राष्ट्रीय नीति निर्माण में बढ़ते प्रतिनिधित्व का भी संकेत है।
Tags:    

Similar News