हाईवे मुआवजा घोटाले पर मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सभी जांच कमेटी सदस्यों को निलंबित किया
Arunachal Pradesh अरुणाचल प्रदेश: राज्य में हाईवे मुआवजा घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे ही उन्हें मामले की जानकारी मिली, तत्काल उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी को इस मामले की विस्तृत जांच का कार्य सौंपा गया था। जांच के दौरान प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने कमेटी के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों को निलंबित कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा, "इस तरह के भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के लिए कोई जगह नहीं है। न्यायसंगत और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी बताया कि मुआवजा वितरण में शामिल सभी प्रक्रियाओं की पूरी समीक्षा की जाएगी और जिन लोगों ने नियमों का उल्लंघन किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस घोटाले में आरोप है कि हाईवे परियोजनाओं के लिए आवंटित मुआवजा राशि का गलत तरीके से उपयोग किया गया। शिकायतों के आधार पर यह मामला उजागर हुआ, जिसमें अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों की मिलीभगत की संभावना जताई जा रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि किस प्रकार से मुआवजा राशि का वितरण और भुगतान किया गया, और किन नियमों का उल्लंघन हुआ।
राज्य सरकार ने जनता के हित को ध्यान में रखते हुए इस मामले में पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ काम करने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई से राज्य में विकास और कानून के शासन को मजबूती मिलेगी। इस घोटाले को लेकर स्थानीय मीडिया और राजनीतिक दलों में चर्चा का माहौल है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार से तत्काल निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता विकास कार्यों और जनता के हितों की सुरक्षा है और किसी भी भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कमेटी की रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर पूरे राज्य की नजरें हैं। राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष होगी।