अरुणाचल: नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (NCPOR), सेंटर फॉर अर्थ साइंसेज एंड हिमालयन स्टडीज (CESHS) और नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NERIST) की एक संयुक्त वैज्ञानिक टीम ने अरुणाचल प्रदेश में पूर्वी हिमालय के मागो चू बेसिन में स्थित खांगरी ग्लेशियर के लिए अपना छठा फील्ड अभियान पूरा कर लिया है।
10 अक्टूबर, 2026 को शुरू हुए इस अभियान का मुख्य फोकस ग्लेशियर की निगरानी, ​​झीलों का सर्वेक्षण और अधिक ऊंचाई वाले क्रायोस्फीयर (बर्फ और हिम वाले क्षेत्रों) में होने वाले बदलावों का आकलन करना था।
इसकी प्रमुख गतिविधियों में सांगन्या नेखु (ब्लू) झील के आउटलेट पर एक नया 'हाइड्रोमैट' (HydroMAT) मॉनिटरिंग साइट स्थापित करना और सोनार से लैस 'अपाचे' नाव का उपयोग करके झील की गहराई का विस्तृत सर्वेक्षण (बैथीमेट्रिक सर्वे) करना शामिल था।
टीम ने बर्फ के नुकसान का पता लगाने के लिए ग्लेशियर की सतह पर बर्फ के पिघलने (एब्लेशन) का अनुमान लगाया और ग्लेशियर के पिघलने तथा सतह पर होने वाले बदलावों की निगरानी के लिए खांगरी ग्लेशियर पर बांस के चार नए खंभे (स्टेक्स) लगाए।
इसके अलावा, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) द्वारा चिन्हित और 'रिस्क टाइप A' तथा 'B' के अंतर्गत वर्गीकृत की गई चार झीलों का हवाई सर्वेक्षण भी किया गया।
यह अभियान पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत NCPOR, अरुणाचल प्रदेश सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत CESHS, और NERIST द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया था।
खांगरी ग्लेशियर पर पिछले चार वर्षों से दीर्घकालिक वैज्ञानिक शोध चल रहा है। इस शोध का उद्देश्य ग्लेशियर की गतिशीलता को बेहतर ढंग से समझना, ग्लेशियर के द्रव्यमान और सतह की विशेषताओं में होने वाले बदलावों पर नज़र रखना, और यह आकलन करना है कि अधिक ऊंचाई वाले क्रायोस्फीयर पर जलवायु परिवर्तन का क्या असर पड़ रहा है।
इस नवीनतम अभियान का पूरा होना अरुणाचल प्रदेश में चल रहे क्रायोस्फीयर अनुसंधान कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
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