अमरावती। आंध्र प्रदेश में बढ़ती महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर निशाना साधा है। जगन ने आरोप लगाया है कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं के दाम बढ़ने से आम जनता की आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हैं। उन्होंने बिजली शुल्क, पेट्रोल-डीजल, खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक सेवाओं की बढ़ती लागत को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बढ़ते खर्च के अनुपात में आम लोगों की आय नहीं बढ़ रही है, जिससे परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है।वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने राज्य सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि जनता को राहत देने के बजाय उस पर लगातार वित्तीय बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गठबंधन सरकार चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है। उनके अनुसार, आम परिवारों को खाद्यान्न, बिजली, परिवहन और अन्य जरूरी खर्चों के लिए पहले से अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के सामने घरेलू खर्च चलाना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी और आय के सीमित अवसरों के कारण लोगों की क्रय शक्ति प्रभावित हो रही है। जगन ने राज्य सरकार से आम जनता की समस्याओं पर ध्यान देने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता तथा कीमतों को लेकर प्रभावी कदम उठाने की मांग की।इससे पहले अगस्त 2026 में वाईएसआरसीपी के प्रदेश प्रवक्ता पुथा शिवशंकर ने भी महंगाई को लेकर चंद्रबाबू नायडू सरकार पर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि राज्य में चावल, दाल, चीनी, प्याज और खाद्य तेल सहित कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।पुथा शिवशंकर ने कहा था कि जगन सरकार के कार्यकाल में सामान्य चावल की कीमत लगभग 40 रुपये प्रति किलो थी, जो बढ़कर 65 रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने सुपर फाइन चावल की कीमत 48 रुपये से 75 रुपये प्रति किलो होने का दावा किया था। इसी तरह तुअर और उड़द दाल की कीमतों में भी बढ़ोतरी का आरोप लगाया गया था। हालांकि, ये आंकड़े विपक्षी पार्टी की ओर से दिए गए हैं और इन्हें राज्यभर की स्वतंत्र रूप से सत्यापित औसत बाजार कीमतें नहीं माना जा सकता।
वाईएसआरसीपी ने खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों पर भी चिंता जताई है। पार्टी के अनुसार, पाम ऑयल, सूरजमुखी तेल और मूंगफली तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से घरेलू खर्च प्रभावित हुआ है। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि कई परिवार अपनी मासिक आय का बड़ा हिस्सा केवल आवश्यक वस्तुओं की खरीद पर खर्च करने के लिए मजबूर हैं।महंगाई के साथ बिजली बिल भी राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है। जगन मोहन रेड्डी ने आरोप लगाया है कि बिजली शुल्क में बढ़ोतरी से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बिजली खर्च में वृद्धि का असर छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और किसानों पर भी पड़ रहा है।वाईएसआरसीपी नेताओं का कहना है कि बिजली की लागत बढ़ने से छोटे उद्योगों का परिचालन खर्च बढ़ सकता है। इससे उत्पादन और सेवाओं की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका रहती है। विपक्ष ने सरकार से बिजली शुल्क की समीक्षा करने और आर्थिक रूप से कमजोर उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की है।
इस बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर भी राज्य में आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। जगन ने ईंधन पर लगने वाले करों और परिवहन खर्च को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की है। उनका कहना है कि परिवहन लागत बढ़ने से आवश्यक वस्तुओं की कीमतें प्रभावित होती हैं।हालांकि, सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने विपक्ष के आरोपों का विरोध किया है। तेलुगु देशम पार्टी के विधायक सोमिरेड्डी चंद्रमोहन रेड्डी ने मई 2026 में कहा था कि ईंधन की ऊंची कीमतों के लिए पिछली वाईएसआरसीपी सरकार की कर नीतियां भी जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया था कि वर्तमान गठबंधन सरकार ने राज्य स्तर पर उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की परिस्थितियों को भी कीमतों में बदलाव का एक कारण बताया था।महंगाई के अलावा किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर भी जगन लगातार सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के कई किसानों को अपनी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। धान, मक्का, केला, नारियल, कपास, मिर्च, टमाटर और तंबाकू जैसी फसलों के उत्पादकों की समस्याओं को लेकर उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी।
अगस्त 2026 में तंबाकू किसानों से मुलाकात के दौरान जगन ने कहा था कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए सरकारी एजेंसियों को बाजार में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने मार्कफेड के माध्यम से तंबाकू की खरीद करने और किसानों को कीमतों में गिरावट से राहत देने की मांग की थी।वाईएसआरसीपी का आरोप है कि एक तरफ आम उपभोक्ताओं को बाजार में बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कई किसानों को अपनी फसलों के पर्याप्त दाम नहीं मिल रहे हैं। पार्टी ने इसे कृषि विपणन और मूल्य स्थिरीकरण से जुड़ी नीतियों की समस्या बताया है।राजनीतिक स्तर पर देखा जाए तो आंध्र प्रदेश में महंगाई, रोजगार, बिजली और किसानों से जुड़े मुद्दे सत्तापक्ष तथा विपक्ष के बीच बहस का प्रमुख विषय बने हुए हैं। जगन मोहन रेड्डी लगातार गठबंधन सरकार के कामकाज की आलोचना कर रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल अपनी नीतियों और पूर्ववर्ती सरकार के आर्थिक फैसलों का हवाला देकर विपक्ष के आरोपों का जवाब दे रहा है।
महंगाई की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, वस्तुओं की आधिकारिक खुदरा कीमतों, बिजली शुल्क और घरेलू आय से जुड़े आंकड़ों की तुलना आवश्यक है। केवल राजनीतिक बयानों के आधार पर सभी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी या उसके लिए किसी एक सरकार की जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती।फिलहाल वाईएस जगन मोहन रेड्डी के आरोपों ने आंध्र प्रदेश की राजनीति में महंगाई और आम जनता की आर्थिक स्थिति को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आगामी दिनों में राज्य सरकार की ओर से कीमतों पर नियंत्रण, किसानों को राहत और उपभोक्ताओं के हितों से जुड़े कदमों पर राजनीतिक दलों की नजर बनी रहेगी।
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