नामांकन के दौरान आंध्र प्रदेश में बवाल उम्मीदवारों से जबरन छीने गए पर्चे
अमरावती। आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार, 21 अक्टूबर को पलनाडु जिले के माचेरला और चित्तूर जिले में हिंसा की घटनाएं सामने आईं। विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने आरोप लगाया कि तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के कार्यकर्ताओं ने उसके उम्मीदवारों पर हमला किया और नामांकन पत्र जबरन छीन लिए। वहीं, चित्तूर में राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री के. नारायण स्वामी पर भी कथित तौर पर हमला किया गया। इन घटनाओं के बाद चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और उम्मीदवारों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
माचेरला में नामांकन दाखिल करने पहुंचे उम्मीदवारों पर हमला
जानकारी के अनुसार, पलनाडु जिले के माचेरला में मंडल परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र (MPTC) सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार अपने नामांकन पत्र जमा करने मंडल कार्यालय पहुंचे थे।पार्टी का आरोप है कि कार्यालय के पास मौजूद टीडीपी कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने का प्रयास किया। इस दौरान कथित तौर पर उम्मीदवारों के साथ मारपीट की गई और उनके नामांकन पत्र जबरन छीन लिए गए।घटना के कारण नामांकन प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हुई। वाईएसआरसीपी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए आरोप लगाया कि चुनावी मुकाबले से विपक्षी उम्मीदवारों को दूर रखने की कोशिश की जा रही है।
पूर्व उप मुख्यमंत्री के. नारायण स्वामी पर भी हमला
चित्तूर जिले में भी इसी तरह की घटना सामने आई है। यहां पूर्व उप मुख्यमंत्री और वाईएसआरसीपी नेता के. नारायण स्वामी पर जिला परिषद अध्यक्ष कार्यालय के पास कथित तौर पर हमला किया गया।रिपोर्ट के अनुसार, नारायण स्वामी पेनुमुरु क्षेत्र से जिला परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र (ZPTC) सीट के लिए नामांकन दाखिल कराने में सहायता करने पहुंचे थे।इसी दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने कथित रूप से उन पर हमला कर दिया। वाईएसआरसीपी ने इस घटना के लिए भी टीडीपी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की आधिकारिक पहचान स्पष्ट होना बाकी है।
चुनावी हिंसा को लेकर YSRCP ने उठाए सवाल
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि राज्य के कई हिस्सों में उसके उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।पार्टी के अनुसार, नामांकन दाखिल करने पहुंचे उम्मीदवारों को धमकाने, उनके दस्तावेज छीनने और चुनाव कार्यालयों तक पहुंचने से रोकने जैसी घटनाएं सामने आई हैं।इससे पहले भी आंध्र प्रदेश के पुंगनूर और कुप्पम सहित विभिन्न क्षेत्रों में टीडीपी तथा वाईएसआरसीपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की घटनाएं सामने आई थीं। कुछ स्थानों पर पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा था
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को दिए निर्देश
स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान हिंसा और नामांकन प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोपों को लेकर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है।बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह 22 अक्टूबर तक शिकायतों की जांच कर नामांकन की समय-सीमा बढ़ाने पर निर्णय ले।अदालत ने कहा कि यदि किसी उम्मीदवार को कानून-व्यवस्था की समस्या के कारण नामांकन दाखिल करने से रोका गया है, तो आयोग संबंधित सबूतों की जांच करे। समय-सीमा बढ़ाने का फैसला होने पर उम्मीदवारों को कम से कम 48 घंटे का अवसर देने का निर्देश भी दिया गया है।इसके अलावा अदालत ने उम्मीदवारों की अंतिम सूची के प्रकाशन को फिलहाल स्थगित करने और राज्य के पुलिस महानिदेशक को चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
निष्पक्ष चुनाव कराने की चुनौती
आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर लगातार सामने आ रही हिंसा और धमकी की शिकायतों ने प्रशासन तथा चुनाव आयोग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव में उम्मीदवारों को स्वतंत्र रूप से नामांकन दाखिल करने और प्रचार करने का अवसर मिलना आवश्यक है। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया के दौरान हिंसा के आरोपों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।फिलहाल माचेरला और चित्तूर की घटनाओं को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। अब राज्य चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इन घटनाओं में कौन लोग शामिल थे और नामांकन प्रक्रिया को किस हद तक प्रभावित किया गया।