विजयवाड़ा: हाई कोर्ट ने शुक्रवार को गाडे साईं कृष्णा की कथित कस्टोडियल मौत (पुलिस हिरासत में मौत) की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में निष्पक्ष जांच के लिए राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर उनकी मां, विजयलक्ष्मी को 25 लाख रुपये का मुआवजा दे। जस्टिस रविनाथ तिलहारी और जस्टिस अलापति गिरिधर की खंडपीठ ने 89 पन्नों का यह फैसला सुनाया। यह फैसला विजयलक्ष्मी द्वारा दायर एक याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने अपने बेटे की मौत और उसके शव के गायब होने की स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
खंडपीठ ने CBI निदेशक को निर्देश दिया कि वे तुरंत मामला दर्ज करें और जांच की जिम्मेदारी किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपें। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वे इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज एक विशेष दूत के जरिए CBI को सौंप दें। सरकार को यह भी निर्देश दिया गया कि वह सेवा नियमों के अनुसार, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करे।
हाई कोर्ट ने कहा कि उसके सामने पेश किए गए सबूतों से प्रथम दृष्टया यह साबित होता है कि साईं कृष्णा को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था, उसे हिरासत में प्रताड़ित किया गया और पुलिस हिरासत के दौरान ही उसकी मौत हो गई। उसका शव या अवशेष अभी तक नहीं मिले हैं।
फैसले के अनुसार, 6 मई 2026 को सुबह करीब 7 बजे विजयवाड़ा कमिश्नर की टास्क फोर्स (CTF) पुलिस, साईं कृष्णा को कृष्णा लंका पुलिस स्टेशन लाई थी। हालांकि शुरुआत में उसकी हिरासत कानूनी थी, लेकिन पुलिस ने उसे तय समय के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया और न ही उसे रिहा किया, जो कानून का उल्लंघन है।