Alluri सीताराम राजू की 129वीं जयंती पर विजयवाड़ा में ऐतिहासिक फोटो प्रदर्शनी का आयोजन
Andhra Pradesh आंध्र प्रदेश: महान स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू की 129वीं जयंती के अवसर पर विजयवाड़ा स्थित बुक फेस्टिवल सोसाइटी बिल्डिंग में उनके जीवन, देशभक्ति और बलिदान को दर्शाने वाली एक विशेष ऐतिहासिक फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। यह प्रदर्शनी दो दिनों तक चलेगी और इसमें उनके जीवन से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें, ऐतिहासिक दस्तावेज और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रदर्शित किया गया है।
इस प्रदर्शनी का आयोजन आंध्र प्रदेश भाषा और संस्कृति विभाग, मजेटी राजाजी आर्ट एकेडमी (राजामहेंद्रवरम), ड्रीम वर्क्स आर्ट गैलरी (विजयवाड़ा) और कॉमरेड जीआरके पोलावरापु कल्चरल ऑर्गनाइजेशन के संयुक्त सहयोग से किया गया है। राज्य सरकार के भाषा और संस्कृति विभाग द्वारा इस पूरे कार्यक्रम को पूरा समर्थन दिया गया है, जिससे इस आयोजन को एक व्यापक और सांस्कृतिक स्वरूप मिला है।
कार्यक्रम के दौरान आयोजकों ने उन लोगों को भी सम्मानित किया जिन्होंने इस प्रदर्शनी को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसमें जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता गोला नारायण और पी रमेश को उनके विशेष सहयोग के लिए सम्मान प्रदान किया गया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे सहयोग के बिना इस प्रकार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रदर्शनी को सफल बनाना संभव नहीं होता।
इस अवसर पर आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस अकुला वेंकट शेष साई और गन्नमनेनी रामकृष्ण प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और अल्लूरी सीताराम राजू के जीवन और उनके स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
इसके अलावा कार्यक्रम में साहित्य और सांस्कृतिक क्षेत्र से कई प्रमुख हस्तियां भी मौजूद रहीं। इनमें मजेटी रवि प्रकाश, रविकांत, नरेंद्र कुमार और शेखर जैसे नाम शामिल रहे, जिन्होंने प्रदर्शनी की सराहना की और इसे एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहल बताया।
प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, आम नागरिक, साहित्य प्रेमी और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोग पहुंचे। सभी ने प्रदर्शनी में प्रदर्शित दुर्लभ तस्वीरों और ऐतिहासिक सामग्री को बड़ी रुचि और उत्सुकता के साथ देखा। कई आगंतुकों ने कहा कि इस तरह की प्रदर्शनी युवाओं को इतिहास से जोड़ने और स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के योगदान को समझने में मदद करती है।
आयोजकों ने बताया कि इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य अल्लूरी सीताराम राजू के बलिदान और उनके नेतृत्व में चले आदिवासी आंदोलन को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि आज भी उनके विचार और संघर्ष देशभक्ति की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनी स्थल पर सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला। विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी इस पहल की सराहना की और इसे भविष्य में और बड़े स्तर पर आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भाषा और संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार इस तरह के आयोजनों को लगातार बढ़ावा दे रही है ताकि इतिहास, कला और संस्कृति को संरक्षित किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि अल्लूरी सीताराम राजू जैसे महान नायकों की गाथाएं केवल किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आगंतुकों का धन्यवाद किया और प्रदर्शनी को सफल बनाने में मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भी इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन जारी रहेगा, जिससे समाज में इतिहास के प्रति जागरूकता और बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, यह प्रदर्शनी न केवल अल्लूरी सीताराम राजू के जीवन और बलिदान को याद करने का माध्यम बनी, बल्कि इसने नई पीढ़ी को उनके आदर्शों और देशभक्ति की भावना से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया।