Andhra Pradesh आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश के कुरनूल और पूरे रायलसीमा क्षेत्र में मुख्य कृषि फसलों की कीमतों में भारी गिरावट ने किसानों को गंभीर आर्थिक संकट में डाल दिया है। पिछले कुछ हफ्तों से केले और मौसमी जैसे फलों की खेती करने वाले किसान लगातार कम दामों के कारण परेशान हैं।
रायलसीमा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर की जाने वाली खेती अब लाभकारी नहीं रह गई है, क्योंकि बाजार में फसलों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। किसानों का कहना है कि इस बार कई प्रमुख फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तक नहीं मिला, जिससे उनकी लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है।
केले और मौसमी की खेती इस क्षेत्र की प्रमुख फसलों में शामिल है, लेकिन इस सीजन में इनकी कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। इससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ा है और कई किसान नुकसान में चले गए हैं।
रायलसीमा में किसानों की आय का बड़ा हिस्सा इन फसलों पर निर्भर करता है, लेकिन बाजार में मांग और कीमतों के असंतुलन ने उनकी स्थिति को और कमजोर कर दिया है।
इसके अलावा, बाजरा, काला चना और हल्दी जैसी फसलों के किसान भी अब संकट से गुजर रहे हैं। इन फसलों की खेती करने वालों को भी अपेक्षित मुनाफा नहीं मिल रहा है, जिससे पूरे कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ गया है।
कुरनूल जिले के किसानों का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद बाजार में फसलों के दाम लगातार गिर रहे हैं। इससे खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है।
किसानों के अनुसार, डीजल, खाद और मजदूरी की कीमतें बढ़ने के कारण उनकी कुल लागत काफी बढ़ गई है, लेकिन फसलों के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़े। इस असंतुलन ने उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है।
रायलसीमा के कई किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि फसलों के लिए उचित समर्थन मूल्य सुनिश्चित किया जाए और बाजार में स्थिरता लाई जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फसल मूल्य में गिरावट का यह रुझान जारी रहा, तो कृषि क्षेत्र में संकट और गहरा सकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।
कुरनूल प्रशासन से भी किसानों ने हस्तक्षेप की मांग की है ताकि उन्हें उचित मूल्य मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।
कुल मिलाकर, रायलसीमा में फसल कीमतों में गिरावट ने किसानों को गंभीर संकट में डाल दिया है, जहां केले, मौसमी, बाजरा, काला चना और हल्दी जैसी प्रमुख फसलें लगातार घाटे का कारण बन रही हैं।