आंध्र प्रदेश: मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को तटीय जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 28 अक्टूबर को तट से टकराने वाले एक भीषण चक्रवाती तूफान से होने वाले जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाएं। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि ‘अर्नब’ नाम का यह भीषण चक्रवाती तूफान बापटला और विशाखापत्तनम के बीच, यानम के पास तट को पार कर सकता है। मंगलवार दोपहर से श्रीकाकुलम से लेकर नेल्लोर तक के कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है, साथ ही तटीय इलाकों में तेज हवाएं भी चल सकती हैं।
अधिकारियों ने बताया कि 28 और 29 अक्टूबर को उत्तरी तटीय आंध्र के जिलों, कोनासीमा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, एलुरु, कृष्णा, एनटीआर, गुंटूर, पलनाडु, बापटला, प्रकाशम और नेल्लोर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि चक्रवात से निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे एहतियाती कदमों की जानकारी केंद्र सरकार को देते रहें।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बाढ़ संभावित और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को चक्रवात आश्रय स्थलों (साइक्लोन शेल्टर) में स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाते समय बुजुर्गों, दिव्यांगों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि राज्य भर में चिन्हित 4,711 गर्भवती महिलाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में स्थानांतरित करने की तैयारी चल रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित जिलों के स्वास्थ्य केंद्रों में मेडिकल टीमों और एम्बुलेंस को तैयार रखने का निर्देश दिया।
उन्होंने 11 संवेदनशील जिलों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की सात टीमों और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की आठ टीमों को तैनात करने का भी निर्देश दिया। एनटीआर और विशाखापत्तनम जिलों में अतिरिक्त बलों को स्टैंडबाय पर रखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बचाव और राहत कार्यों के लिए मरीन पुलिस, नौसेना और तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) के साथ समन्वय करें। अधिकारियों ने बताया कि समुद्र में गए सभी मछुआरों को सुरक्षित वापस तट पर ला लिया गया है और 30,043 नावें सुरक्षित रूप से बंदरगाहों पर पहुंच गई हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि मछुआरे तब तक समुद्र में न जाएं, जब तक कि चक्रवात कमजोर न हो जाए और स्थिति सामान्य न हो जाए। मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कटी हुई धान की फसल को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना सुनिश्चित करें, ताकि उसे नुकसान से बचाया जा सके।
उन्होंने चक्रवात से प्रभावित हो सकने वाली लगभग 1.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैली बागवानी फसलों की सुरक्षा के लिए भी एहतियाती कदम उठाने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राशन की दुकानों पर जरूरी सामान का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जाए और जहां भी बिजली आपूर्ति बाधित हो, उसे तुरंत बहाल किया जाए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि तांडव, रायवाड़ा, येलेरू, तम्मीलेरू, येर्राकलवा और तादिपुडी जलाशयों में पानी उनकी पूरी भंडारण क्षमता तक भर सकता है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि पानी के सुचारू प्रवाह के लिए नदियों, छोटी धाराओं और नहरों में किसी तरह की रुकावट न हो, यह सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया कि सोशल मीडिया के जरिए चक्रवात के बारे में गलत जानकारी फैलाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे अलग-अलग क्षेत्रों पर पड़ने वाले संभावित असर का आकलन करें और जहां जरूरी हो, वहां शिक्षण संस्थानों में छुट्टी घोषित कर दें।