Vijayawada विजयवाड़ा : आंध्र प्रदेश में SSC 2026 परीक्षाओं के नतीजों में इस बार उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। राज्य का कुल पास प्रतिशत 85.25 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष के 81.1 प्रतिशत के मुकाबले अधिक है। इस सुधार को शिक्षा विभाग की 100 दिन की फोकस्ड अकादमिक पहल से जोड़ा जा रहा है, जिसका नेतृत्व नारा लोकेश ने किया।
शिक्षा विभाग के अनुसार, इस विशेष पहल के तहत छात्रों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए कई उपाय किए गए थे। इनमें नियमित मॉनिटरिंग, अतिरिक्त कक्षाएं, शिक्षकों के लिए विशेष मार्गदर्शन और छात्रों के लिए लक्ष्य आधारित पढ़ाई शामिल थी। इन प्रयासों का असर इस साल के परिणामों में स्पष्ट रूप से देखा गया।
खास बात यह रही कि सरकारी स्कूलों के प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत पिछले साल के 72.8 प्रतिशत से बढ़कर इस बार 78.39 प्रतिशत हो गया है। इससे सरकारी और निजी स्कूलों के बीच का अंतर कम होता दिखाई दे रहा है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में सुधार के लिए विशेष रणनीति अपनाई गई थी। कमजोर छात्रों पर अतिरिक्त ध्यान दिया गया और उन्हें परीक्षा के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया गया। इसके अलावा, शिक्षकों को भी प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए गए, जिससे शिक्षण प्रक्रिया में सुधार हुआ।
हालांकि, राज्य में कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। इस वर्ष केवल पांच सरकारी स्कूल ऐसे रहे, जहां परिणाम शून्य (जीरो) रहा। विभाग ने इन स्कूलों की पहचान कर ली है और उनके प्रदर्शन में सुधार के लिए विशेष कदम उठाने की बात कही है।
शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह परिणाम छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयासों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए इसी तरह की पहल जारी रखी जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पास प्रतिशत बढ़ाना नहीं, बल्कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। इसके लिए नई योजनाओं और तकनीकों को भी अपनाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लक्षित अकादमिक पहल से शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने में मदद मिलती है। यदि इस मॉडल को निरंतर लागू किया जाए, तो आने वाले वर्षों में और बेहतर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
राज्य में इस बार के SSC परिणामों ने यह संकेत दिया है कि सही योजना और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव संभव है।