विजयवाड़ा: आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों में BC (पिछड़े वर्गों) को 34 प्रतिशत आरक्षण देने वाले सरकार के दो आदेशों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कुल आरक्षण सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 50 प्रतिशत की सीमा से ज़्यादा नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को छह हफ़्ते के अंदर चुनाव प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।
चीफ़ जस्टिस लिसा गिल और जस्टिस चल्ला गुना रंजन की डिवीज़न बेंच ने गुरुवार को यह फ़ैसला सुनाया और राज्य सरकार को BC आरक्षण की समीक्षा करने और इसे सुप्रीम कोर्ट के पिछले फ़ैसलों के अनुरूप बनाने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि सरकार 'विकास किशनराव गवली' और 'जनहित अभियान' मामलों में आए फ़ैसलों के अनुसार ठोस डेटा (empirical data) इकट्ठा करने के बाद 50% की सीमा के भीतर BC आरक्षण दे सकती है।
कोर्ट ने माना कि 50 प्रतिशत से ज़्यादा BC आरक्षण को सही ठहराने के लिए राज्य सरकार के यूनिफाइड फ़ैमिली सर्वे के ज़रिए इकट्ठा किया गया डेटा अमान्य था। कोर्ट ने पाया कि सरकार के पास सीमा से ज़्यादा आरक्षण का समर्थन करने के लिए वैज्ञानिक रूप से तैयार किया गया डेटा नहीं था।
कोर्ट ने ध्यान दिलाया कि राज्य में ग्राम पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम परिषदों का कार्यकाल मार्च-अप्रैल में खत्म हो गया था और कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव कराने की ज़िम्मेदारी राज्य चुनाव आयोग की है। कोर्ट ने SEC को छह हफ़्ते के अंदर चुनाव प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा वोटर लिस्ट (electoral rolls) का जो स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) किया जा रहा है, वह स्थानीय निकाय चुनाव कराने में कोई बाधा नहीं है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव उस तारीख़ पर उपलब्ध वोटर लिस्ट का इस्तेमाल करके कराए जा सकते हैं और मौजूदा लिस्ट को सिर्फ़ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता कि SIR चल रहा है।
याचिकाकर्ता के सीनियर वकील ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों को रोकने का कोई इरादा नहीं है, बशर्ते AP पंचायत राज एक्ट, 1994 की धारा 11, AP नगरपालिका एक्ट, 1965 और नगर निगम एक्ट, 1995 की धारा 12 के तहत सभी कानूनी ज़रूरतों का पालन किया जाए। राज्य चुनाव आयोग के वकील ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि इन ज़रूरतों का पालन किया जाएगा। इन दलीलों के आधार पर, कोर्ट ने कहा कि राज्य में ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू करने में देरी करने का कोई कारण नहीं है। कोर्ट ने कहा कि वह BC आरक्षण की पुष्टि के लिए राजीव रंजन आयोग के गठन की कानूनी वैधता की जांच नहीं कर रहा है, क्योंकि याचिकाकर्ता ने इसके गठन को चुनौती नहीं दी थी। कोर्ट ने AP BC वेलफेयर यूनियन के अध्यक्ष केसाना संकरा राव की ओर से दायर उस PIL को खारिज कर दिया, जिसमें BC जनगणना होने तक स्थानीय निकाय चुनावों को टालने की मांग की गई थी। कोर्ट ने एक और PIL भी खारिज कर दी, जिसमें BC उप-वर्गीकरण पूरा होने तक चुनाव टालने की मांग की गई थी।