अमरावती: कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन मंत्री के. अच्चन्नायडू ने मंगलवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि चक्रवात 'अरनाब' को देखते हुए सभी जरूरी एहतियाती कदम उठाए जाएं, ताकि जान-माल का कोई नुकसान न हो और किसानों, फसलों, पशुधन तथा सार्वजनिक संपत्ति को होने वाले नुकसान को कम से कम किया जा सके।
मंत्री ने चक्रवात की तैयारियों की समीक्षा के लिए श्रीकाकुलम, पार्वतीपुरम मन्यम और डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिलों के कलेक्टर्स, एसपी, संयुक्त कलेक्टर्स और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ टेलीकॉन्फ्रेंस की।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, चक्रवात के 28 अक्टूबर को यानम के पास तट से टकराने की संभावना है। इस दौरान हवा की गति 115-125 किमी प्रति घंटा हो सकती है, और हवा के झोंके 140 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को सतर्क रहने और तटीय गांवों, निचले इलाकों, बाढ़ संभावित क्षेत्रों तथा भूस्खलन की आशंका वाले स्थानों से लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का निर्देश दिया। उन्होंने तीनों जिलों के प्रशासन को 24 घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम बनाने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि राहत केंद्रों में भोजन, पीने का पानी, चिकित्सा सुविधाएं और बिजली की व्यवस्था हो।
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों को विशेष सुरक्षा दी जानी चाहिए। बचाव कार्यों के लिए NDRF और SDRF की टीमों को तैयार रहना चाहिए। खतरनाक सड़कों, पुलों और जलधाराओं पर आवाजाही को नियंत्रित किया जाना चाहिए।
अच्चन्नायडू ने जोर देकर कहा कि कृषि और बागवानी फसलों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कटाई के लिए तैयार धान और खलिहानों में रखे अनाज को सुरक्षित किया जाना चाहिए। धान को भीगने से बचाने के लिए खरीद केंद्रों पर तिरपाल और गोदामों की व्यवस्था होनी चाहिए। धान, मक्का, कपास और दालों के खेतों में जलभराव को रोकने के लिए जल निकासी का इंतजाम किया जाना चाहिए। केले, पपीते, नारियल, ऑयल पाम और आम के बागानों को तेज हवाओं से बचाने के लिए भी एहतियाती कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को 'रैथु सेवा केंद्रों' (Rythu Seva Kendras) के माध्यम से किसानों को मौसम संबंधी चेतावनी पहले ही जारी करने का निर्देश दिया। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे पशुधन को बाढ़ संभावित इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर ले जाएं और उनके लिए चारे, दवाओं तथा पशु चिकित्सा टीमों को तैयार रखें। उन्होंने श्रीकाकुलम में वमसाधारा और नागावली नदी घाटियों, पार्वतीपुरम मन्यम के पहाड़ी इलाकों और आदिवासी गांवों, तथा कोनासीमा में गोदावरी डेल्टा, तटीय क्षेत्रों और जलीय कृषि तालाबों की विशेष निगरानी करने को कहा।