अमरावती: आंध्र प्रदेश पर 'मुरासु' (Murasu) नाम के एक और चक्रवात का खतरा मंडरा रहा है। इसे देखते हुए, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने पूरे प्रशासनिक तंत्र को निर्देश दिया कि वे संभावित प्रभावों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें और राहत एवं बचाव कार्यों के लिए मुस्तैद रहें।

मुख्यमंत्री ने राज्य पर चक्रवात के संभावित असर, बारिश और हवा की तीव्रता, जलाशयों के प्रबंधन, विभिन्न विभागों की तैयारियों और उनके द्वारा उठाए जाने वाले अग्रिम कदमों की समीक्षा की। चक्रवात के खतरे को देखते हुए, उन्होंने सोमवार को होने वाले अपने दिल्ली दौरे को भी रद्द करने की घोषणा की।

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वर्तमान 'डिप्रेशन' (कम दबाव का क्षेत्र) के और गहरा होकर 'डीप डिप्रेशन' में बदलने और फिर चक्रवात का रूप लेने की संभावना है। इसके 2 नवंबर तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में एक गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने और 3 नवंबर की सुबह बापटला के पास तट को पार करने की उम्मीद है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 2 और 3 नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। IMD ने सोमवार के लिए पांच जिलों — कृष्णा, गुंटूर, बापटला, प्रकाशम और एसपीएसआर नेल्लोर — में 'रेड अलर्ट' जारी किया है, जहां अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।

चक्रवात के तट से टकराते समय हवा की गति 100–110 किमी प्रति घंटा हो सकती है। 20 मंडलों में अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका है, जिनमें एलुरु जिले के नौ मंडल, कृष्णा और एनटीआर जिलों के पांच-पांच मंडल, और बापटला जिले का एक मंडल शामिल है।

अधिकारियों के अनुमान के अनुसार, 3 नवंबर को एलुरु में लगभग 179 मिमी, कृष्णा में 163 मिमी, एनटीआर में 161 मिमी, पश्चिम गोदावरी में 147 मिमी, गुंटूर में 119 मिमी और बापटला जिले में 104 मिमी औसत बारिश हो सकती है।

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के कारण 3 नवंबर को बुडमेरु (Budameru) में लगभग 32,500 क्यूसेक पानी का बहाव आ सकता है। इसके अलावा, एर्राकलवा (Errakalva), गोनेलावागु (Gonelavagu), जल्लेरू (Jalleru) और पांपा (Pampa) जलाशयों में भी भारी मात्रा में पानी आने की संभावना है। तेज़ हवाओं से 12 ज़िलों में लगभग 12,000 से 15,000 बिजली के खंभों को नुकसान पहुँच सकता है। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग को ज़रूरी मैनपावर, उपकरण और अन्य संसाधनों की व्यवस्था पहले से ही कर लेने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अन्य क्षेत्रों से अतिरिक्त कर्मचारियों और ज़रूरी सामान को जुटाएं और चक्रवात आने से पहले ही उन्हें संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दें। उन्होंने एक स्पष्ट कार्य योजना बनाने पर ज़ोर दिया, जिसमें यह बताया गया हो कि जिन इलाकों में बिजली के खंभे गिर सकते हैं, वहां बिजली बहाल करने में कितना समय लगेगा। अधिकारियों को यह भी चाहिए कि वे बिजली बहाली के संभावित समय के बारे में जनता को जानकारी दें। नायडू ने अधिकारियों को हर चार घंटे में चक्रवात की स्थिति पर बुलेटिन जारी करने का निर्देश दिया। उन्होंने टेलीकॉम ऑपरेटरों से कहा कि वे मोबाइल नेटवर्क में रुकावट को रोकने के लिए पहले से ही ज़रूरी कदम उठाएं, खासकर उन इलाकों में जहां मौसम के बहुत खराब होने की आशंका है।

चक्रवात 'अरनाब' के दौरान के अनुभव का ज़िक्र करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि टेलीकॉम कंपनियों को और अधिक मज़बूत एहतियाती कदम उठाने चाहिए थे। उन्होंने कंपनियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि आने वाले चक्रवात के दौरान संचार व्यवस्था में फिर से ऐसी कोई रुकावट न आए।

बैठक के दौरान, अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को चक्रवात 'अरनाब' से हुए नुकसान और चल रहे राहत व बहाली कार्यों की प्रगति के बारे में जानकारी दी। नायडू ने चक्रवात प्रभावित इलाकों में बिजली बहाली के काम की समीक्षा की। अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि रविवार रात तक सभी प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।

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