Andhra: आदित्य-एल1, प्रोबा-3 सौर विस्फोटों के प्रारंभिक विकास पर प्रकाश डालते हैं
नेल्लोर: भारत के आदित्य-L1 और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के प्रोबा-3 मिशनों के संयुक्त अवलोकनों ने 'कोरोनल मास इजेक्शन' (CMEs) - यानी सूर्य से निकलने वाले प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्रों के विशाल विस्फोटों - की शुरुआती प्रक्रिया के बारे में नई जानकारी दी है।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के शोधकर्ताओं ने 14 और 16 सितंबर, 2025 को हुए दो CMEs का विश्लेषण किया। इन्हें आदित्य-L1 के 'विजिबल एमिशन लाइन कोरोनोग्राफ' (VELC) और प्रोबा-3 के 'ASPIICS' उपकरण द्वारा एक साथ देखा गया था।
14 सितंबर को हुआ CME लगभग 645 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से आगे बढ़ा, जबकि 16 सितंबर की घटना 145 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से हुई। VELC ने इन दोनों विस्फोटों को उनकी शुरुआती अवस्था में ही कैद कर लिया। इससे ASPIICS के अवलोकनों को और मजबूती मिली, जिससे इनके द्रव्यमान (mass), घनत्व (density) और ऊर्जा का स्वतंत्र रूप से अनुमान लगाना संभव हो सका।
अध्ययन से पता चला कि 14 सितंबर के CME की कुल ऊर्जा में थर्मल ऊर्जा का हिस्सा केवल 1% के आसपास था। वहीं, 16 सितंबर की घटना में थर्मल ऊर्जा बढ़कर काइनेटिक (गतिज) ऊर्जा के बराबर हो गई। चुंबकीय ऊर्जा का स्तर काइनेटिक ऊर्जा के बराबर या उससे अधिक पाया गया।
ये निष्कर्ष बताते हैं कि सूर्य के भीतरी कोरोना में CMEs की गतिशीलता और ऊर्जा को बेहतर ढंग से समझने के लिए 'व्हाइट-लाइट इमेजिंग' और 'स्पेक्ट्रोस्कोपिक अवलोकनों' को एक साथ मिलाना कितना महत्वपूर्ण है। साथ ही, ये सौर विस्फोटों की समझ को और गहरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलकर किए जाने वाले सौर अनुसंधान की अहमियत को भी दर्शाते हैं।