AI से चलने वाला हेल्थकेयर इकोसिस्टम: संजीवनी 1 जनवरी से राज्य में शुरू होगा
अमरावती: मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 1 जनवरी से पूरे आंध्र प्रदेश में महत्वाकांक्षी 'संजीवनी' हेल्थकेयर प्रोजेक्ट को लागू करें। कुप्पम निर्वाचन क्षेत्र और चित्तूर जिले में इसके सफल कार्यान्वयन को राज्य-व्यापी विस्तार का आधार बनाया जाएगा।
अधिकारियों के साथ संजीवनी प्रोजेक्ट और राज्य की हेल्थकेयर पहलों की समीक्षा करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापक डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स से समर्थित यह कार्यक्रम चिकित्सा सेवाओं के वितरण में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश को हेल्थकेयर डिलीवरी के लिए एक ऐसे मॉडल के रूप में उभरना चाहिए जिसका अन्य राज्य अनुसरण कर सकें।
मुख्यमंत्री ने गौर किया कि परिवार अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा पर खर्च करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अच्छी गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर बनाने और लोगों पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए संजीवनी जैसी पहल शुरू कर रही है।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि राज्य-व्यापी रोलआउट के लिए 90-दिवसीय कार्य योजना तैयार की गई है। इस योजना में बेसलाइन अध्ययन, डिजिटल बुनियादी ढांचे का विकास, स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण और प्रमाणन, तथा राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय स्वास्थ्य पोर्टलों के साथ एकीकरण शामिल है। कार्यान्वयन प्रक्रिया के तहत सभी 28 जिलों में चिकित्सा कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
नायडू ने संजीवनी प्रोजेक्ट में आधिकारिक भागीदार 'टाटा एमडी' (Tata MD) को हेल्थकेयर क्षेत्र में नवीन समाधान पेश करने की दिशा में काम करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने प्रेडिक्टिव (पूर्वानुमान-आधारित), प्रिवेंटिव (रोग-निवारक), क्यूरेटिव (उपचारात्मक) और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इलाज के साथ-साथ, स्वास्थ्य प्रणाली को लोगों में स्वस्थ खान-पान की आदतों और जीवनशैली में बदलाव को भी प्रोत्साहित करना चाहिए।
नायडू ने आयुर्वेद, होम्योपैथी, योग, प्राणायाम और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के प्रभावी उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रणाली में AI-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, जिसमें 'AI डॉक्टर' का व्यापक उपयोग भी शामिल है, को एकीकृत किया जाना चाहिए। नायडू ने नागरिकों के स्वास्थ्य डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी के लिए एक व्यापक डैशबोर्ड विकसित करने और नागरिकों के मोबाइल फोन पर सीधे स्वास्थ्य अपडेट भेजने की प्रणाली स्थापित करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अस्पतालों में स्वच्छता और अन्य आउटसोर्स सेवाओं को बेहतर बनाने तथा कुशल स्वास्थ्य सहायता प्रदान करने में विफल रहने वाले सेवा प्रदाताओं को हटाने के लिए एक नीति बनाने को भी कहा।
मुख्यमंत्री ने कुप्पम और चित्तूर में संजीवनी प्रोजेक्ट के माध्यम से प्राप्त परिणामों की समीक्षा की, जहां इस पहल ने पहले ही उत्साहजनक परिणाम दिखाए हैं। अधिकारियों के अनुसार, चित्तूर में इस प्रोग्राम के तहत पहचाने गए हाइपरटेंशन के 56 प्रतिशत मामलों को कंट्रोल में लाया गया है, जबकि 16 प्रतिशत मामलों में डायबिटीज की गंभीरता कम हुई है। प्राइमरी हेल्थकेयर सेवाओं के इस्तेमाल में भी काफी बढ़ोतरी हुई है।
नागरिक फीडबैक सर्वे से पता चला कि 91 प्रतिशत लोगों ने कहा कि संजीवनी सेवाएं मिलने के बाद उनकी सेहत के बारे में उनकी जागरूकता बढ़ी है। अधिकारियों ने बताया कि स्क्रीनिंग और डायग्नोसिस से लेकर इलाज और फॉलो-अप तक बिना किसी रुकावट के सेवाएं देने के लिए AI-आधारित हेल्थकेयर इकोसिस्टम को और विकसित किया जा रहा है।
इस समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य मंत्री सत्यकुमार यादव, स्वास्थ्य सचिव वीरपांडियन, संयुक्त सचिव रोनांकी गोपालकृष्ण और टाटा MD के प्रतिनिधि शामिल हुए।