MBBS की 77.34% सीटें एससी, एसटी, बीसी छात्रों को आवंटित: एनटीआर स्वास्थ्य विश्वविद्यालय
विजयवाड़ा: डॉ. एनटीआर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा शैक्षणिक वर्ष के लिए काउंसलिंग के तीन दौर पूरे होने के बाद, एमबीबीएस की 4,581 'कन्वीनर कोटा' सीटों में से 3,543 सीटें (यानी 77.34 प्रतिशत) अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़ा वर्ग (BC) के छात्रों को आवंटित की गई हैं।
बुधवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में, यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. टी. साई सुधीर ने प्रवेश प्रक्रिया और सीट आवंटन का विवरण दिया। उन्होंने आरक्षित श्रेणियों के छात्रों को एमबीबीएस सीटें आवंटित किए जाने के संबंध में फैलाए जा रहे 'भ्रामक प्रचार' का कड़ा खंडन किया।
उन्होंने बताया कि NEET-UG के माध्यम से 2026-27 शैक्षणिक वर्ष में, आरक्षित श्रेणी के ऐसे मेधावी छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिन्होंने 'ओपन कैटेगरी' (सामान्य श्रेणी) के तहत सीटें हासिल की हैं।
'ओपन कैटेगरी' के तहत उपलब्ध 2,026 सीटों में से 1,213 सीटें (यानी 59.87 प्रतिशत) काउंसलिंग के तीन दौर के बाद आरक्षित श्रेणियों के मेधावी छात्रों को आवंटित की गईं। इसकी तुलना में, 2025-26 शैक्षणिक वर्ष में यह आंकड़ा 981 सीटों (यानी 51.57 प्रतिशत) का था।
इस पृष्ठभूमि में, रजिस्ट्रार ने उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि इस साल जारी 'सरकारी आदेश 102' (Government Order 102) के कारण एमबीबीएस प्रवेश में आरक्षित श्रेणी के छात्रों को नुकसान हुआ है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षित श्रेणी के मेधावी उम्मीदवारों द्वारा 'ओपन कैटेगरी' के तहत हासिल की गई सीटें, यदि बाद में छोड़ दी जाती हैं, तो उन्हें निर्धारित नियमों के अनुसार संबंधित आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों से ही भरा जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि SC, ST और BC समुदायों के लिए संवैधानिक आरक्षण प्रावधानों के तहत प्रवेश प्रक्रिया, आवश्यकतानुसार अलग से लागू की जा रही है।
डॉ. साई सुधीर ने स्पष्ट किया कि 'मेरिटोरियस रिजर्व्ड कैटेगरी' (MRC) प्रणाली के तहत योग्यता-आधारित सीट आवंटन, आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों द्वारा दिए गए 'वेब विकल्पों' (web options) और लागू प्रवेश नियमों के अनुसार किया गया है।
उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी ने हाल ही में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष भी इस मामले पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि जब यह मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तब भी गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने ऐसे दावे करने वालों से आग्रह किया कि वे भ्रामक जानकारी फैलाना बंद करें। रजिस्ट्रार ने कहा कि विश्वविद्यालय MBBS में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ और स्थापित नियमों व विनियमों के अनुसार ही कर रहा है। उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और आम जनता के बीच जानबूझकर गलत जानकारी फैलाकर भ्रम पैदा करने के प्रयासों पर खेद जताया और सभी संबंधित लोगों से ऐसी हरकतों से बचने की अपील की।