विजयवाड़ा: आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग (SEC) को निर्देश दिया कि वे ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की प्रक्रिया जल्द से जल्द, और किसी भी हाल में छह हफ़्ते के भीतर शुरू करें।
चीफ़ जस्टिस लिसा गिल और जस्टिस चल्ला गुणरंजन की डिवीज़न बेंच ने कहा कि सरकार और SEC की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है कि वे तय समय के भीतर स्थानीय निकायों के चुनाव कराएं। बेंच ने गौर किया कि राज्य में शहरी स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों का कार्यकाल इस साल मार्च और अप्रैल में खत्म हो गया था।
कोर्ट ने पंचायत राज विभाग द्वारा 20 अगस्त को जारी सरकारी आदेश (GO) 105 और म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग द्वारा 19 अगस्त को जारी GO 1065 को रद्द कर दिया, जिनमें स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों (BCs) के लिए 34% आरक्षण का प्रावधान था। कोर्ट ने पाया कि SC, ST और BC के लिए कुल आरक्षण, 34% BC कोटे के साथ 50% की सीमा से ज़्यादा हो गया, जो सुप्रीम कोर्ट के तय सिद्धांतों के खिलाफ है।
बेंच ने सरकार को निर्देश दिया कि वह BC जनगणना पूरी करे और विकास किशनराव गवली मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार समुदायों की सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पर डेटा इकट्ठा करे। साथ ही, कोर्ट ने सरकार को जनहित अभियान मामले के फैसले के अनुसार 50% से ज़्यादा आरक्षण पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया।