जनता से रिश्ता वेबडेस्क। बहुत सारे लोग बादाम को खाने से पहले भिगोना पसंद करते हैं, जबकि दूसरे लोग इसके छिलके के थोड़े कड़वे स्वाद से छुटकारा पाना चाहते हैं. लेकिन इस बारे में आपकी क्या राय है कि भीगे हुए बादाम वास्तव में कच्चे या भूने हुए रूप से बेहतर है?

बादाम पौष्टिकता से भरपूर और फाइबर, प्रोटीन्स, विटामिन ई, मैग्नीशियम, कॉपर, फॉस्फोरस का शानदार स्रोत है. कई रिसर्च में उसका नियमित सेवन बहुत सारे फायदे साबित करता है. वजन कम करने, हड्डी की सेहत, मूड को ठीक करने, दिल की बीमारियों का जोखिम कम करने, कैंसर से लेकर डायबिटीज तक में बादाम को फायदेमंद माना गया है. एक रिसर्च के मुताबिक, लोग ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम मूंगफली, अखरोट और बादाम अधिक मात्रा में खाकर इस्तेमाल नहीं करनेवालों के मुकाबले कम कर सकते हैं.
दूसरी रिसर्च बताती है कि बादाम स्पष्ट रूप से खून में एंटीऑक्सीडेंट्स लेवल को बढ़ाता है, ब्लड प्रेशर कम करता है और रक्त प्रवाह को सुधारता है. टाइप 2 डायबिटीज रोगियों को भी बादाम के इस्तेमाल से लाभ होता है क्योंकि मैग्नीशियम ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है. इतने सारे फायदे जानकर अगर आप एक मुट्ठी बादाम खाने की सोच रहे हैं, तो पहले उसको रात भर भिगोने के बारे में सोचें. अहमदाबाद में सीनियर क्लीनिकल डाइटिशियन श्रुति भारद्वाज ने इस बारे में बताया है कि क्या होता है जब आप बादाम को उसके इस्तेमाल से पहले भिगोते हैं.
भीगे हुए बादाम खाने के फायदे
पाचन शक्ति में सुधार करता है- पाचन के सिलसिले में भीगा बादाम बेहतर है कच्चा भूना के मुकाबले. कोई भी चीज जिसे हम भिगोते हैं, चाहे बादाम हो या कुछ और, चबाने में आसान और पाचन सिस्टम को तोड़ने के लिए ज्यादा नरम होती है. बादाम एंटीऑक्सीडेंट्स का शानदार स्रोत है और जब हम उसे भिगोते हैं, तो फायदे कई गुना बढ़ जाते है
बादाम से ज्यादा पोषण मिलता है- जब हम बादाम को भिगोते हैं, तो उसकी पोषण उपलब्धता बेहतर होती है और जब हम उसे खाते हैं तो एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर के फायदे बढ़ जाते हैं. भिगोने की प्रक्रिया अशुद्धियों को भी दूर करती है और खास पोषक तत्वों के अवशोषण को रोक सकती है. बादाम को भिगोकर खाना विशेषकर बुढ़ापे में बेहतर है क्योंकि उस समय पाचन के मुद्दे और दांतों की समस्याओं में बढ़ोतरी हो सकती है. भिगोने की प्रक्रिया उसे नरम बनाने और आसानी से पचने में मदद करती है.


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