लाइफ स्टाइल : घर, दुकान, ऑफिस या किसी निर्माण स्थल पर बिजली का करंट लगने की घटना कभी भी गंभीर रूप ले सकती है। कई बार बिजली का झटका इतना तेज होता है कि मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं और व्यक्ति बिजली के तार या उपकरण को छोड़ नहीं पाता। आम भाषा में इसे अक्सर कहा जाता है कि करंट लगने के बाद हाथ तार से ‘चिपक गया’। ऐसी स्थिति में घबराकर पीड़ित को सीधे हाथ से पकड़ना सबसे खतरनाक गलती हो सकती है, क्योंकि ऐसा करने वाला व्यक्ति भी करंट की चपेट में आ सकता है।
बिजली के झटके में बाहर से चोट बहुत छोटी दिखाई दे सकती है, लेकिन शरीर के अंदर गंभीर नुकसान हो सकता है। विद्युत प्रवाह हृदय की धड़कन और सांस को प्रभावित कर सकता है और अंदरूनी ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए गंभीर इलेक्ट्रिक शॉक को मेडिकल इमरजेंसी की तरह लेना चाहिए।
सबसे पहले बिजली की सप्लाई बंद करें
अगर किसी व्यक्ति का हाथ बिजली के तार या उपकरण के संपर्क में है तो उसे तुरंत छूने की कोशिश न करें।
सबसे पहला काम बिजली का स्रोत बंद करना है। घर या दुकान में घटना हुई है तो मेन स्विच, सर्किट ब्रेकर या संबंधित बिजली सप्लाई को बंद करें। बिजली बंद होने की पुष्टि होने के बाद ही पीड़ित के पास जाएं।
Mayo Clinic के मुताबिक बिजली के संपर्क में मौजूद व्यक्ति को तब तक नहीं छूना चाहिए जब तक यह सुनिश्चित न हो जाए कि बिजली का प्रवाह बंद हो चुका है।
याद रखें—पीड़ित को बचाने के प्रयास में अपनी सुरक्षा को खतरे में डालना दो लोगों की जान जोखिम में डाल सकता है।
मेन स्विच तक नहीं पहुंच पा रहे तो क्या करें?
यदि बिजली का स्रोत तुरंत बंद नहीं किया जा सकता और मामला घरेलू लो-वोल्टेज स्रोत का है, तो स्वयं बिजली से सुरक्षित दूरी रखते हुए केवल सूखी और बिजली न चलाने वाली वस्तु से स्रोत को पीड़ित से अलग करने की कोशिश की जा सकती है।
Mayo Clinic के अनुसार इसके लिए सूखी लकड़ी, प्लास्टिक या कार्डबोर्ड जैसी non-conducting वस्तु इस्तेमाल की जा सकती है।
लेकिन यह कदम तभी उठाएं जब ऐसा करना आपके लिए सुरक्षित हो। गीली वस्तु, धातु या ऐसी चीज इस्तेमाल न करें जो बिजली का संचालन कर सकती हो।
यदि आसपास पानी है तो खतरा और बढ़ जाता है। गीले फर्श पर खड़े होकर बिजली के तार या उपकरण के पास जाने की कोशिश न करें।
पीड़ित को सीधे हाथ से बिल्कुल न खींचें
यह सबसे महत्वपूर्ण सावधानी है।
जब तक बिजली बंद नहीं हुई है, पीड़ित का शरीर भी विद्युत प्रवाह का हिस्सा हो सकता है। ऐसे में उसका हाथ, पैर या कपड़ा पकड़कर खींचना बचाव करने वाले व्यक्ति को भी बिजली की चपेट में ला सकता है।
इसलिए करंट से संपर्क खत्म होने से पहले व्यक्ति को सीधे हाथ से छूना नहीं चाहिए।
इसी तरह लोहे की रॉड, चाकू, कैंची या दूसरी धातु की वस्तु से तार हटाने की कोशिश भी न करें।
हाई-वोल्टेज तार हो तो पास भी न जाएं
घरेलू बिजली और हाई-वोल्टेज बिजली लाइन की घटना में बड़ा अंतर है।
अगर कोई व्यक्ति टूटे हुए बिजली के खंभे के तार, हाई-वोल्टेज लाइन या जमीन पर गिरे बिजली के तार के संपर्क में है तो खुद बचाव करने के लिए उसके पास जाना बेहद खतरनाक हो सकता है।
ऐसी स्थिति में क्षेत्र से दूर रहें, आसपास मौजूद लोगों को भी पास न आने दें और बिजली विभाग तथा आपातकालीन सेवाओं को तुरंत सूचना दें।
Mayo Clinic के मुताबिक हाई-वोल्टेज तारों के पास तब तक नहीं जाना चाहिए जब तक बिजली आधिकारिक रूप से बंद न कर दी जाए।
बिजली बंद होने के बाद सांस जांचें
जब यह पूरी तरह सुनिश्चित हो जाए कि बिजली का संपर्क समाप्त हो चुका है, तब पीड़ित की स्थिति देखें।
उसे आवाज देकर प्रतिक्रिया जांचें और देखें कि वह सामान्य रूप से सांस ले रहा है या नहीं। यदि व्यक्ति बेहोश है और सांस नहीं ले रहा या केवल हांफ रहा है तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाएं।
अगर आप CPR में प्रशिक्षित हैं तो CPR शुरू करें और उपलब्ध होने पर AED का इस्तेमाल करें। American Red Cross भी बेहोश और सामान्य रूप से सांस न लेने वाले व्यक्ति में तत्काल CPR और AED की सलाह देता है।
भारत में ऐसी आपात स्थिति में एम्बुलेंस/इमरजेंसी सहायता के लिए **112** पर संपर्क किया जा सकता है।
होश में आने पर भी अस्पताल क्यों जरूरी?
कई बार बिजली का झटका लगने के बाद व्यक्ति कुछ मिनट में सामान्य दिखाई देने लगता है। वह बातचीत भी करने लगता है और शरीर पर कोई बड़ी चोट दिखाई नहीं देती।
इसके बावजूद इलेक्ट्रिक शॉक को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
बिजली शरीर के अंदर से गुजरते हुए हृदय, मांसपेशियों, नसों और अन्य ऊतकों को प्रभावित कर सकती है। Mayo Clinic के अनुसार बिजली के संपर्क में आए व्यक्ति को स्वास्थ्य पेशेवर से जांच करानी चाहिए, क्योंकि बाहर कोई स्पष्ट निशान न होने पर भी अंदरूनी चोट संभव है।
खासकर बेहोशी, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, असामान्य धड़कन, भ्रम, दौरा, गंभीर जलन या मांसपेशियों में दर्द और संकुचन होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी है।
जलने के निशान दिखें तो क्या करें?
इलेक्ट्रिक शॉक से त्वचा पर जलने के निशान हो सकते हैं। लेकिन दिखाई देने वाला छोटा सा निशान शरीर के अंदर हुई चोट की गंभीरता नहीं बताता।
बिजली बंद होने और व्यक्ति को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद जले हुए हिस्से को साफ, ठंडे बहते पानी से ठंडा किया जा सकता है। American Red Cross विद्युत जलन को कम से कम 15 मिनट तक ठंडे साफ बहते पानी से ठंडा करने और बाद में जरूरत पड़ने पर ढीली साफ या स्टेराइल ड्रेसिंग लगाने की सलाह देता है।
जले हिस्से पर बर्फ, मक्खन, तेल, टूथपेस्ट या घरेलू क्रीम लगाने से बचें।
अगर कपड़ा त्वचा से चिपका हुआ है तो उसे जबरदस्ती न खींचें।
पीड़ित को तुरंत उठाकर चलाने की कोशिश न करें
तेज बिजली के झटके से व्यक्ति गिर सकता है। गिरने के कारण सिर, गर्दन, रीढ़ या हड्डियों में चोट भी हो सकती है।
इसलिए बिजली का संपर्क खत्म होने के बाद भी बिना जरूरत व्यक्ति को खींचकर या उठाकर इधर-उधर न ले जाएं। अगर सिर, गर्दन या रीढ़ की चोट का संदेह हो तो उसे उसी स्थिति में रहने देना बेहतर है, जब तक वहां कोई तत्काल खतरा न हो।
एम्बुलेंस आने तक उसकी सांस और प्रतिक्रिया पर नजर रखें।
ये गलतियां बिल्कुल न करें
करंट लगने की घटना में कुछ सेकंड के गलत फैसले बचाव करने वाले व्यक्ति को भी खतरे में डाल सकते हैं। इसलिए बिजली चालू रहते पीड़ित को सीधे हाथ से न छुएं, धातु की चीज से तार न हटाएं, पानी न डालें और हाई-वोल्टेज लाइन के पास न जाएं।
अगर व्यक्ति बेहोश हो गया था और बाद में होश में आ गया, तब भी यह मानकर घर पर न छोड़ें कि अब सब ठीक है। बिजली का प्रभाव हृदय और शरीर के अंदरूनी हिस्सों पर हो सकता है।
याद रखें ये आसान क्रम
ऐसी आपात स्थिति में तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं—**पहले अपनी सुरक्षा, फिर बिजली बंद करना और उसके बाद पीड़ित की मदद करना
व्यक्ति तार से चिपका है तो पहले मेन सप्लाई बंद करें। बिजली बंद नहीं हो सकती तो केवल सुरक्षित परिस्थिति में सूखी गैर-चालक वस्तु से स्रोत अलग करें। हाई-वोल्टेज लाइन हो तो खुद पास न जाएं। संपर्क टूटने के बाद सांस और होश की जांच करें। सांस न होने पर प्रशिक्षित व्यक्ति CPR शुरू करे और तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाए।
सबसे जरूरी बात यह है कि बिजली के झटके को केवल त्वचा पर लगी चोट देखकर छोटा या बड़ा न समझें। मामूली दिखने वाला इलेक्ट्रिक शॉक भी अंदरूनी चोट या हृदय की समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए गंभीर झटके या किसी भी चिंताजनक लक्षण के बाद चिकित्सकीय जांच कराना सुरक्षित विकल्प है।
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