कॉन्टैक्ट लेंस या चश्मा क्या है बेहतर

नेत्र विशेषज्ञ बताते हैं कि कॉन्टेक्ट लेंस का इस्तेमाल अधिकतम 8 से 10 घंटे ही करना चाहिए

Update: 2023-02-28 12:59 GMT
आंखें बताती हैं आपकी खूबसूरती इसलिए इनका ख्याल रखना बेहद जरूरी है। कई बार जब यह ठीक से दिखाई नहीं देता है तो इसे चश्मा लगाकर ठीक किया जाता है। पिछले कुछ समय में लोगों की आंखों में चश्मे की जगह कॉन्टैक्ट लेंस लगने लगे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 से 2025 तक देश में कॉन्टैक्ट लेंस की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट 7.5 फीसदी बढ़ सकती है।नेत्र रोग विशेषज्ञ के अनुसार चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस दोनों आंखों के लिए उपयुक्त होते हैं। हालांकि, उनका उपयोग विभिन्न स्थितियों में किया जाता है। कुछ मरीजों के लिए चश्मा बेहतर माना जाता है और कुछ की आंखें लेंस के हिसाब से होती हैं। चश्मा और कॉन्टैक्ट लेंस दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं।
आँखों के लिए कौन सा चश्मा सबसे अच्छा है
नेत्र रोग विशेषज्ञ के अनुसार नेत्र रोग विशेषज्ञ मरीजों को कॉन्टैक्ट लेंस की जगह चश्मा पहनना चाहिए। चश्मा लगाना और उतारना बहुत आसान है। इसके लिए ज्यादा तामझाम करने की जरूरत नहीं है। आंखों के ऊपर होने के कारण यह अंदरूनी हिस्सों को नहीं छू पाता और आंख संक्रमण से दूर रहती है।
कॉन्टैक्ट लेंस के क्या नुकसान हैं
नेत्र विशेषज्ञ बताते हैं कि कॉन्टेक्ट लेंस का इस्तेमाल अधिकतम 8 से 10 घंटे ही करना चाहिए। अगर आप इसे लंबे समय तक पहने रहते हैं और इसकी साफ-सफाई पर ध्यान नहीं देते हैं तो यह आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। चूंकि इसे आंख के अंदर कॉर्निया पर लगाया जाता है, अगर स्वच्छता बनाए नहीं रखी जाए तो खतरनाक बैक्टीरिया पनप सकते हैं और इससे दृष्टि की हानि भी हो सकती है।
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