India भारत : बरसात के मौसम में जहां एक ओर मौसम सुहावना हो जाता है, वहीं दूसरी ओर यह समय स्वास्थ्य और फसलों दोनों के लिए कई चुनौतियां भी लेकर आता है। इस दौरान नमी और उमस बढ़ने के कारण खेतों में उगने वाली कई फसलों में फंगल इन्फेक्शन और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के मौसम में पत्तेदार सब्जियों पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिलता है। पालक, मेथी, धनिया और अन्य हरी सब्जियों में नमी के कारण बैक्टीरिया और फंगस तेजी से विकसित होते हैं। यही कारण है कि इन सब्जियों को खाने से पहले अच्छी तरह धोने और साफ करने की सलाह दी जाती है।
इसके अलावा, मशरूम जैसी सब्जियां जो स्वाभाविक रूप से नमी वाले वातावरण में ही उगती हैं, उनमें भी बरसात के दौरान बैक्टीरियल संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। अगर इन्हें सही तरीके से स्टोर या पकाया न जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में केवल पत्तेदार सब्जियां ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य सब्जियों पर भी इसका प्रभाव देखा जाता है। अरबी, बैंगन और फूलगोभी जैसी सब्जियों में भी नमी और मौसम के बदलाव के कारण कीट और फंगल संक्रमण की संभावना अधिक रहती है। इन सब्जियों का सेवन यदि ठीक से साफ-सफाई के बिना किया जाए तो यह पेट से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, बरसात के मौसम में दूषित या संक्रमित सब्जियों का सेवन करने से डायरिया, फूड पॉइजनिंग और पेट में संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए इस मौसम में खानपान को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि सब्जियों को खरीदने के बाद उन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए और संभव हो तो हल्के गर्म पानी का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा, सब्जियों को लंबे समय तक खुले में न रखने और फ्रिज में सही तरीके से स्टोर करने की भी सलाह दी जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में ताजा और पकी हुई सब्जियों का सेवन करना ज्यादा सुरक्षित होता है। कच्ची सब्जियों के सेवन से बचना चाहिए, खासकर उन सब्जियों से जो सीधे मिट्टी और नमी के संपर्क में रहती हैं।