लाइफस्टाइल । अपराजिता का पौधा अपने खूबसूरत नीले और सफेद फूलों के कारण घरों और बगीचों में खूब लगाया जाता है। कई लोग इसे बालकनी, छत या गमले में भी आसानी से उगाते हैं। हालांकि, कई बार पौधा हरा-भरा होने के बावजूद उसमें फूल बहुत कम आते हैं या फ्लावरिंग पूरी तरह रुक जाती है। ऐसी स्थिति में पौधे की देखभाल के साथ सही पोषण देना जरूरी है।
अगर आपके अपराजिता के पौधे में भी फूल नहीं आ रहे हैं तो घर पर तैयार किया गया केले के छिलके का घोल इस्तेमाल किया जा सकता है। केले के छिलकों में मौजूद पोटैशियम सहित कुछ पोषक तत्व पौधों के लिए उपयोगी होते हैं। हालांकि, केवल कोई एक घोल ही भरपूर फूलों की गारंटी नहीं देता। धूप, मिट्टी, पानी और पौधे की सेहत भी फ्लावरिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
केले के छिलके से बनाएं घोल
अपराजिता के लिए केले के छिलके का घोल बनाना काफी आसान है। इसके लिए दो केले के छिलके छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। अब इन्हें करीब एक लीटर पानी में डालकर 24 से 48 घंटे तक रखें।
इसके बाद पानी को छान लें। इस्तेमाल करने से पहले इस घोल को सामान्य पानी मिलाकर हल्का करना बेहतर है। तैयार घोल को पौधे की जड़ों के आसपास मिट्टी में सीमित मात्रा में डालें। इसे बहुत ज्यादा या बार-बार इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
केले के छिलकों को सीधे गमले की मिट्टी के ऊपर बड़ी मात्रा में डालने की बजाय कंपोस्ट करना बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि सड़ते हुए जैविक पदार्थ कीटों को आकर्षित कर सकते हैं।
अच्छी धूप भी है जरूरी
सिर्फ खाद देने से पौधे में फूल नहीं आएंगे। अपराजिता को पर्याप्त रोशनी भी चाहिए। पौधे को ऐसी जगह रखें जहां उसे रोजाना कई घंटे अच्छी धूप मिल सके। बहुत ज्यादा छाया वाली जगह पर पौधा तेजी से पत्तियां तो विकसित कर सकता है, लेकिन फूल कम हो सकते हैं।
अगर आपका पौधा बालकनी में रखा है तो ध्यान दें कि आसपास की दीवार या बड़े पौधे उसकी धूप को पूरी तरह न रोक रहे हों।
ज्यादा पानी बन सकता है समस्या
अपराजिता के पौधे को पानी देते समय मिट्टी की स्थिति जरूर जांचें। अगर ऊपरी मिट्टी अभी भी गीली है तो तुरंत दोबारा पानी न दें। लगातार गीली रहने वाली मिट्टी जड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
गमले में ड्रेनेज होल होना बेहद जरूरी है, ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। पानी जमा रहने से जड़ों के सड़ने का खतरा बढ़ सकता है और पौधे की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।
नाइट्रोजन की अधिकता से बचें
पौधे को जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन वाली खाद देने पर कई बार पत्तियां तो खूब बढ़ती हैं, लेकिन फूल अपेक्षाकृत कम दिखाई देते हैं। इसलिए खाद का इस्तेमाल संतुलित मात्रा में करें। फूल देने वाले पौधों में पोषण का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
अगर पौधा लंबे समय से एक ही गमले में लगा है तो मिट्टी में अच्छी तरह तैयार कंपोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट सीमित मात्रा में मिलाया जा सकता है।
सूखी टहनियों की करें छंटाई
पौधे पर सूखी, कमजोर या खराब टहनियां दिखाई दें तो उनकी हल्की छंटाई की जा सकती है। इससे पौधे को व्यवस्थित रखने और नई ग्रोथ के लिए जगह बनाने में मदद मिलती है। बेल को सहारा देने के लिए जाली या स्टिक भी लगाई जा सकती है।
ध्यान रखें कि किसी भी घरेलू खाद या घोल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है। अपराजिता में अच्छी फ्लावरिंग के लिए पर्याप्त धूप, सही मात्रा में पानी, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और संतुलित पोषण सबसे महत्वपूर्ण हैं। इन बातों का ध्यान रखते हुए केले के छिलके के हल्के घोल को अतिरिक्त पोषण के तौर पर आजमाया जा सकता है।