लाइफ स्टाइल : अगर आप अपने घर के गार्डन, बालकनी या छत को रंग-बिरंगे फूलों से सजाना चाहते हैं तो **सितंबर का महीना बागवानी के लिए बेहद खास** हो सकता है। मानसून की विदाई और सर्दियों की शुरुआत के बीच का यह समय कई मौसमी फूलों के बीज लगाने के लिए उपयुक्त माना जाता है। सही पौधों का चुनाव और थोड़ी सी देखभाल आपके गार्डन को आने वाले हफ्तों और महीनों में खूबसूरत फूलों से भर सकती है।
सितंबर में कई इलाकों में मिट्टी में नमी बनी रहती है और तेज गर्मी भी धीरे-धीरे कम होने लगती है। ऐसे मौसम में सर्दियों में खिलने वाले कई फूलों की बुवाई शुरू की जा सकती है। खास बात यह है कि इनमें से कई पौधे गमलों में भी आसानी से लगाए जा सकते हैं। इसलिए बड़ा गार्डन न होने पर भी बालकनी या छत पर इन्हें उगाया जा सकता है।
1. गेंदा
गेंदा भारतीय घरों में सबसे ज्यादा लगाए जाने वाले फूलों में शामिल है। पीले और नारंगी रंग के इसके फूल पूजा-पाठ से लेकर घर की सजावट तक में इस्तेमाल किए जाते हैं।
सितंबर में गेंदा लगाने के लिए ऐसी जगह चुनें जहां पौधे को पर्याप्त धूप मिल सके। बीजों को बहुत ज्यादा गहराई में न लगाएं। मिट्टी को नम रखें लेकिन गमले में पानी जमा न होने दें।
सही देखभाल मिलने पर पौधा तेजी से बढ़ता है और कुछ समय बाद उसमें कलियां दिखाई देने लगती हैं। नियमित रूप से सूखे फूल हटाने से नई कलियां आने में मदद मिल सकती है।
2. पेटूनिया
सर्दियों में रंग-बिरंगे फूलों से गार्डन सजाने के लिए **पेटूनिया** एक शानदार विकल्प है। इसके सफेद, गुलाबी, बैंगनी, लाल और कई मिश्रित रंगों के फूल मिलते हैं।
पेटूनिया के बीज काफी छोटे होते हैं, इसलिए इन्हें मिट्टी की सतह पर हल्के हाथ से बोना बेहतर रहता है। अंकुरण के दौरान मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखें।
पौधा थोड़ा बड़ा होने के बाद इसे अलग गमले में लगाया जा सकता है। पेटूनिया को अच्छी धूप पसंद होती है। इसकी कई किस्में हैंगिंग बास्केट में भी बेहद खूबसूरत दिखाई देती हैं।
3. कैलेंडुला
अगर आपको चमकीले पीले और नारंगी रंग के फूल पसंद हैं तो **कैलेंडुला** भी लगाया जा सकता है। इसे पॉट मैरीगोल्ड भी कहा जाता है।
ठंडे मौसम में कैलेंडुला अच्छी तरह बढ़ता है। सितंबर से इसकी बुवाई शुरू की जा सकती है, हालांकि सही समय स्थानीय जलवायु पर निर्भर करेगा।
बीज लगाने के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी चुनें। मिट्टी में कम्पोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद मिलाने से पौधे को शुरुआती पोषण मिल सकता है।
कैलेंडुला को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त रोशनी मिले। पौधे में फूल आने के बाद पुराने और मुरझाए फूलों को हटाते रहने से फूलों का मौसम लंबा किया जा सकता है।
4. डाइएन्थस
छोटे लेकिन बेहद आकर्षक फूलों वाला **डाइएन्थस** सर्दियों के गार्डन को खूबसूरत बना सकता है। गुलाबी, लाल, सफेद और दो रंगों वाली कई किस्में उपलब्ध होती हैं।
इसके लिए ढीली और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी बेहतर रहती है। गमले के नीचे ड्रेनेज होल होना जरूरी है, क्योंकि लगातार पानी जमा रहने से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
अंकुर निकलने के बाद पौधों को पर्याप्त जगह देना चाहिए। इससे हवा का प्रवाह बना रहता है और पौधे अच्छी तरह विकसित हो पाते हैं।
5. स्वीट एलिसम
गार्डन की क्यारियों के किनारे या हैंगिंग पॉट को आकर्षक बनाने के लिए **स्वीट एलिसम** बेहतरीन विकल्प हो सकता है। इसके छोटे-छोटे सफेद, गुलाबी और बैंगनी फूल गुच्छों में खिलते हैं।
एलिसम का पौधा ज्यादा बड़ा नहीं होता, इसलिए छोटे गमलों और बालकनी गार्डन में भी आसानी से लगाया जा सकता है।
बीजों को हल्की मिट्टी में बोएं और शुरुआत में नमी बनाए रखें। पौधा विकसित होने के बाद उसे पर्याप्त रोशनी दें। इसके छोटे फूल एक साथ खिलने पर बेहद खूबसूरत दिखाई देते हैं।
बीज लगाने से पहले तैयार करें सही मिट्टी
फूलों की अच्छी ग्रोथ के लिए केवल अच्छे बीज खरीदना पर्याप्त नहीं है। मिट्टी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
गार्डन की सामान्य मिट्टी में कम्पोस्ट और जल निकासी सुधारने वाली सामग्री मिलाकर पॉटिंग मिक्स तैयार किया जा सकता है। गमले में अतिरिक्त पानी बाहर निकलने की व्यवस्था जरूर रखें।
बहुत भारी और लगातार गीली रहने वाली मिट्टी में पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं।
पानी देते समय न करें यह गलती
नए बीजों को अंकुरित होने तक नमी की जरूरत होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मिट्टी में लगातार पानी भरा रहे।
शुरुआत में स्प्रे बोतल या हल्की धार से पानी देना बेहतर रहता है, ताकि बीज अपनी जगह से न हटें।
पौधे बड़े होने के बाद पानी देने की जरूरत मौसम, मिट्टी और गमले के आकार के अनुसार बदल सकती है। मिट्टी की ऊपरी परत देखकर पानी देने का फैसला किया जा सकता है।
धूप का रखें खास ध्यान
अधिकांश फूलों को अच्छी ग्रोथ और ज्यादा फूलों के लिए पर्याप्त रोशनी की जरूरत होती है। इसलिए गमले ऐसी जगह रखें जहां दिन में कई घंटे धूप मिल सके।
हालांकि बहुत छोटे अंकुरों को अचानक तेज धूप में रखने के बजाय धीरे-धीरे खुले वातावरण के अनुकूल करना बेहतर रहता है।
खाद कब दें
बीज अंकुरित होने के तुरंत बाद ज्यादा खाद देने की जरूरत नहीं होती। पौधे थोड़ा विकसित हो जाएं तो कम्पोस्ट या उपयुक्त संतुलित खाद सीमित मात्रा में दी जा सकती है।
जरूरत से ज्यादा खाद देने से पौधे में पत्तियां तो तेजी से बढ़ सकती हैं लेकिन फूल कम आ सकते हैं।
भारत में एक ही समय सभी जगह लागू नहीं
सितंबर में बुवाई का समय बताते हुए स्थानीय मौसम को ध्यान में रखना जरूरी है। उत्तर भारत में सर्दियों के फूलों की तैयारी इस दौरान शुरू की जा सकती है, जबकि बहुत गर्म या अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में कुछ फूलों की बुवाई थोड़ी देर से करना बेहतर हो सकता है।
इसलिए बीज खरीदते समय पैकेट पर दिए गए स्थानीय बुवाई निर्देशों को भी जरूर देखें।
कुछ ही गमलों से बदल जाएगा बालकनी का लुक
गार्डनिंग शुरू करने के लिए बड़ी जगह जरूरी नहीं है। गेंदा, पेटूनिया, कैलेंडुला, डाइएन्थस और स्वीट एलिसम जैसे फूल अलग-अलग आकार के गमलों में लगाकर एक खूबसूरत मिनी गार्डन तैयार किया जा सकता है।
अलग-अलग ऊंचाई और रंग वाले फूलों को एक साथ रखने से बालकनी या छत और आकर्षक दिखाई दे सकती है।