Karwa Chauth व्रत: विवाहित महिलाओं के लिए अटूट प्रेम और दीर्घायु की कामना का पर्व
Lifestyle,लाइफस्टाइल: हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का पर्व बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। वे अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना करते हुए निर्जला उपवास रखती हैं और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारायण करती हैं।
करवा चौथ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में विवाह के पवित्र बंधन और स्त्री के समर्पण का प्रतीक बन चुका है।
करवा चौथ 2025 में कब है?
तिथि: बुधवार, 8 अक्टूबर 2025
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 8 अक्टूबर को सुबह 03:17 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: 9 अक्टूबर को सुबह 01:25 बजे
चंद्रोदय का समय (दिल्ली में): 8:19 PM (रात) (स्थानानुसार समय भिन्न हो सकता है)
करवा चौथ का महत्व
करवा चौथ का व्रत प्रेम, विश्वास और त्याग का प्रतीक है। इस दिन विवाहित महिलाएं सूर्योदय से पहले ‘सर्गी’ (सास द्वारा दी गई पूजा थाली) ग्रहण करती हैं और फिर दिनभर बिना अन्न और जल के उपवास करती हैं। रात को चंद्रमा को देखकर व्रत तोड़ा जाता है।
इस पर्व की मान्यता है कि व्रत रखने से पति की उम्र लंबी होती है और दांपत्य जीवन में प्रेम व विश्वास बना रहता है। अब तो कुछ आधुनिक दंपति एक-दूसरे के लिए व्रत रखकर इस पर्व को समानता और परस्पर सहयोग का उदाहरण बना रहे हैं।
पौराणिक कथा का महत्व
करवा चौथ से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है वीरवती की, जिसने अपने पहले करवा चौथ पर पूरा दिन उपवास रखा लेकिन शाम होते-होते कमजोरी से बेहाल हो गई। भाइयों ने छल से चंद्रमा की झूठी झलक दिखाकर उसका व्रत खुलवाया। इसके बाद उसे अपने पति की मृत्यु का दुखद समाचार मिला। वीरवती ने पूरे वर्ष घोर तपस्या कर अगला करवा चौथ व्रत फिर से विधिपूर्वक किया और यमराज से अपने पति को पुनर्जीवन दिलवाया।
इस कथा के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि श्रद्धा, नियम और संयम से किया गया व्रत असाध्य को भी साध्य बना सकता है।
व्रत की परंपराएं और विधि
सर्गी खाना: सूर्योदय से पहले फल, मिठाई, सूखे मेवे और हल्का भोजन खाकर व्रत की शुरुआत होती है।
पूजा विधि:
दिन में मां पार्वती, भगवान शिव, गणेश और करवा माता की पूजा की जाती है।
शाम को बिंदी, चूड़ी, मेंहदी जैसे सौभाग्य के प्रतीकों से सजी महिलाएं सामूहिक रूप से कथा सुनती हैं।
चंद्रमा पूजन: रात को चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य दिया जाता है और पति के हाथों से पानी पीकर व्रत तोड़ा जाता है।
आधुनिक युग में करवा चौथ
आज के समय में करवा चौथ एक पारंपरिक पर्व से बढ़कर सामाजिक और भावनात्मक उत्सव बन चुका है। जहां पहले इसे केवल महिलाओं का पर्व माना जाता था, वहीं अब पति भी पत्नी के साथ व्रत रखकर प्यार और समानता की मिसाल पेश कर रहे हैं। सोशल मीडिया और टीवी सीरियल्स ने भी इस पर्व की लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी है।
निष्कर्ष
करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि भारतीय नारी के प्रेम, समर्पण और संस्कार का जीवंत उदाहरण है। यह पर्व यह सिखाता है कि रिश्तों में त्याग और विश्वास ही सबसे बड़ा बल है। 8 अक्टूबर 2025 को जब देश की लाखों महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देंगी, तो उनके मन में होगा बस एक ही संकल्प — पति की लंबी उम्र और सुखमय जीवन।