New Delhi. नई दिल्ली। आंखें न सिर्फ दुनिया को देखने का जरिया हैं, बल्कि यह आपके शरीर की सेहत का आईना भी हैं। अमेरिकन सोसाइटी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी के अनुसार, आंखों के रंग में बदलाव भले ही दुर्लभ हो, लेकिन कभी-कभी पुतलियों और आंख के सफेद हिस्से का रंग बदलना शरीर में किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। ये बदलाव लिवर, कैंसर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं, इसलिए आंखों की सेहत पर नजर रखना जरूरी है।
आंखों के रंग बदलने के कारण
आई स्पेशलिस्ट उमर चौधरी के अनुसार आंखों के रंग बदलने के पीछे जीन, बीमारियां, दवाएं और चोट (ट्रॉमा) जैसे कई कारण शामिल हैं। अधिकांश मामलों में यह नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन कभी-कभी यह गंभीर मेडिकल कंडीशन का संकेत हो सकते हैं।
1. आंखों का पीला पड़ना
अगर आंखों का सफेद हिस्सा पीला दिखे, तो यह पीलिया (Jaundice) की चेतावनी हो सकती है। पीलिया में खून में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है, जो लिवर की खराबी का संकेत देता है। इससे आंखों और त्वचा का रंग पीला दिखने लगता है।
2. आइरिस फ्रेकल्स (Iris Freckles)
आइरिस पर छोटे भूरे धब्बे, जिन्हें आइरिस फ्रेकल्स कहते हैं, आम तौर पर मेलेनिन के जमा होने से बनते हैं। यह धूप के संपर्क में आने से भी हो सकते हैं। अधिकांश समय ये नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन आंखों में कोई बदलाव दिखे तो डॉक्टर से जांच कराएं।
3. आइरिस नेवी (Iris Nevi)
आइरिस नेवी में आंखों पर बड़ी झाइयां या गहरे रंग के उभार बनते हैं, जो तिल जैसे दिखते हैं। ये मेलानोसाइट्स नामक पिग्मेंट सेल्स के कारण होते हैं। नेवी धीरे-धीरे बढ़ते हैं और कभी-कभी कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। इस स्थिति में तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
4. लिस्च नॉड्यूल्स (Lisch Nodules)
लिस्च नॉड्यूल्स आइरिस पर छोटे भूरे रंग के उभार होते हैं। यह आमतौर पर न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस नामक तंत्रिका प्रणाली की समस्या से जुड़े होते हैं। यह जेनेटिक कंडीशन हो सकती है और न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस की जांच में मदद करती है। हालांकि ये आंखों की रोशनी पर असर नहीं डालते।
सुझाव:
आंखों के रंग और बदलावों पर हमेशा ध्यान दें।
पीलेपन या असामान्य धब्बों की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।
आंखों को UV किरणों से बचाएं और नियमित नेत्र परीक्षण कराएं।
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