नई दिल्ली: दिवाली भारत के सबसे बड़े और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। रोशनी, मिठाइयों, रंगोली और परिवार के साथ खुशियां बांटने का यह पर्व सदियों से उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है। हालांकि बदलते समय, आधुनिक तकनीक और व्यस्त जीवनशैली ने दिवाली मनाने के तौर-तरीकों में काफी बदलाव ला दिया है। एक समय था जब त्योहार की तैयारियां कई सप्ताह पहले शुरू हो जाती थीं। घरों की सफाई, मिट्टी के दीयों की खरीदारी, हाथों से रंगोली बनाना और पारंपरिक मिठाइयां तैयार करना उत्सव का अहम हिस्सा हुआ करता था। अब इनकी जगह काफी हद तक तैयार सजावटी सामान, इलेक्ट्रिक लाइट्स, ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल शुभकामनाओं ने ले ली है।
रंगोली बनाने की जगह रेडीमेड स्टीकर
पहले दिवाली पर घर के आंगन में रंगोली बनाने की अलग ही परंपरा थी। परिवार की महिलाएं और बच्चे मिलकर रंग-बिरंगे पाउडर, फूलों और चावल से सुंदर आकृतियां तैयार करते थे। अब बाजार में तैयार रंगोली स्टीकर, रंगोली मैट और सजावटी डिजाइन आसानी से उपलब्ध हैं। इन्हें लगाने में समय कम लगता है और सफाई भी आसान होती है। खासकर व्यस्त परिवारों और अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों के बीच ये विकल्प सुविधाजनक माने जाते हैं।
मिट्टी के दीयों की जगह इलेक्ट्रिक लाइट्स
दिवाली की सबसे बड़ी पहचान मिट्टी के दीये रहे हैं। पहले घरों की छतों, खिड़कियों और आंगन में सरसों के तेल या घी से भरे दीये जलाए जाते थे। अब LED झालर, इलेक्ट्रिक दीये, सजावटी लैंप और रंग बदलने वाली लाइट्स का इस्तेमाल बढ़ गया है। इनसे घरों को कम समय में सजाया जा सकता है और कई दिनों तक रोशनी की व्यवस्था बनाए रखना आसान होता है। इसके बावजूद मिट्टी के दीयों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बना हुआ है। अनेक परिवार पूजा के समय पारंपरिक दीये जलाना पसंद करते हैं।
घर की मिठाइयों से ऑनलाइन गिफ्ट पैक तक
पहले दिवाली से कई दिन पहले घरों में लड्डू, गुजिया, नमकीन, चकली और अन्य पारंपरिक पकवान तैयार किए जाते थे। त्योहार की तैयारियों में परिवार के सदस्य मिलकर हिस्सा लेते थे। आज मिठाई की दुकानों, सुपरमार्केट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर तैयार गिफ्ट पैक उपलब्ध हैं। मिठाइयों के साथ ड्राई फ्रूट्स, चॉकलेट, कुकीज और सजावटी उपहार भी लोकप्रिय विकल्प बन गए हैं। इस बदलाव का एक कारण कामकाजी परिवारों की व्यस्त दिनचर्या है। हालांकि घर में मिठाइयां बनाने की परंपरा आज भी कई परिवारों में उत्साह से निभाई जाती है।
ग्रीटिंग कार्ड से डिजिटल शुभकामनाओं तक
एक समय दिवाली की शुभकामनाएं देने के लिए लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को ग्रीटिंग कार्ड भेजते थे। दूर रहने वाले परिवार के सदस्यों को पत्र और कार्ड पहुंचने में कई दिन लग जाते थे। अब WhatsApp, Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से कुछ ही सेकंड में शुभकामनाएं भेजी जा सकती हैं। फोटो, वीडियो, डिजिटल कार्ड और एनिमेटेड संदेशों ने त्योहार की बधाई देने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। वीडियो कॉलिंग के जरिए विदेश या दूसरे शहर में रहने वाले परिवार के सदस्य भी त्योहार की खुशियों में शामिल हो सकते हैं।
बाजार की भीड़ से ऑनलाइन खरीदारी तक
पहले दिवाली की खरीदारी के लिए परिवार के लोग बाजार जाते थे। नए कपड़े, सजावटी सामान, मिठाइयां और पूजा सामग्री खरीदने का अपना अलग उत्साह होता था। अब ऑनलाइन शॉपिंग ने खरीदारी को सुविधाजनक बना दिया है। ग्राहक घर बैठे कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान, गिफ्ट और सजावट की चीजें मंगवा सकते हैं। इसके बावजूद त्योहार के दौरान स्थानीय बाजारों की रौनक का विशेष महत्व है। धनतेरस और दिवाली पर बड़ी संख्या में लोग आज भी दुकानों से खरीदारी करना पसंद करते हैं।
पटाखों की जगह पर्यावरण के प्रति जागरूकता
दिवाली मनाने के तरीकों में एक महत्वपूर्ण बदलाव पर्यावरण और स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता भी है। पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए कुछ परिवार कम पटाखे जलाने या बिना पटाखों के त्योहार मनाने को प्राथमिकता देने लगे हैं। फूलों की सजावट, पारंपरिक दीये, सामूहिक पूजा और परिवार के साथ समय बिताने जैसे विकल्प भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
बदल गया अंदाज, लेकिन त्योहार की भावना वही
आधुनिक सुविधाओं ने दिवाली की तैयारियों को आसान बनाया है। जहां पहले सजावट और पकवान तैयार करने में कई दिन लगते थे, वहीं अब बाजार में लगभग हर चीज तैयार मिल जाती है। हालांकि इन बदलावों के बीच एक सवाल यह भी उठता है कि कहीं सुविधा के कारण त्योहार की सामूहिक तैयारियों और पारिवारिक परंपराओं का महत्व कम तो नहीं हो रहा। दिवाली का वास्तविक महत्व केवल सजावट, खरीदारी और रोशनी तक सीमित नहीं है। यह पर्व परिवारों को जोड़ने, रिश्तों में मिठास बढ़ाने और खुशियां साझा करने का अवसर भी है।
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