लाइफ स्टाइल : भारतीय घरों में दाल रोजमर्रा के खाने का अहम हिस्सा है। दाल-चावल हो या दाल-रोटी, इसे स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन माना जाता है। अरहर, मूंग, मसूर, उड़द और चना दाल अलग-अलग तरीकों से बनाई जाती हैं। लेकिन क्या आप दाल बनाने का सही तरीका अपना रहे हैं? छोटी-छोटी गलतियों की वजह से दाल का स्वाद, बनावट और पाचन प्रभावित हो सकता है। शेफ पंकज भदौरिया ने दाल बनाने से जुड़ी कुछ ऐसी बातों पर ध्यान दिलाया है, जिन्हें अपनाकर घर की साधारण दाल को भी बेहतर बनाया जा सकता है।
सबसे पहले दाल को अच्छी तरह धोएं
दाल बनाने की शुरुआत उसकी सफाई से होती है। पकाने से पहले दाल को साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। दाल को दो-तीन बार पानी से धोने पर उस पर मौजूद धूल और दूसरी अशुद्धियां निकल जाती हैं।दाल धोते समय उसे बहुत ज्यादा रगड़ने की जरूरत नहीं होती। साफ पानी में हल्के हाथों से धोना पर्याप्त है। जब पानी अपेक्षाकृत साफ दिखाई देने लगे, तब दाल को भिगोने या सीधे पकाने की तैयारी की जा सकती है।
दाल को भिगोना क्यों है फायदेमंद?
कई लोग जल्दी के कारण दाल धोने के तुरंत बाद कुकर में डाल देते हैं। हालांकि कुछ समय तक दाल भिगोकर रखने से वह जल्दी और समान रूप से पक सकती है।दाल के प्रकार के हिसाब से भिगोने का समय अलग हो सकता है। मूंग और मसूर जैसी छोटी दालों को लंबे समय तक भिगोना जरूरी नहीं होता, जबकि चना या उड़द जैसी दालों को अधिक समय तक भिगोने से पकाने में आसानी हो सकती है।भिगोने का एक फायदा यह भी है कि दाल नरम होने में कम समय लेती है। इससे गैस या बिजली की बचत भी हो सकती है।
पानी की मात्रा का रखें ध्यान
दाल बनाते समय सबसे आम समस्या पानी की मात्रा को लेकर होती है। ज्यादा पानी डालने से दाल जरूरत से अधिक पतली हो सकती है और कम पानी में दाल नीचे लगने का खतरा रहता है।पानी की मात्रा दाल की किस्म और आप किस तरह की दाल पसंद करते हैं, इस पर निर्भर करती है। अगर गाढ़ी दाल पसंद है तो पानी थोड़ा कम रखा जा सकता है। पतली दाल के लिए मात्रा बढ़ाई जा सकती है।बेहतर तरीका यह है कि शुरुआत में जरूरत के मुताबिक पानी डालें और बाद में आवश्यकता होने पर गर्म पानी मिलाकर उसकी कंसिस्टेंसी ठीक करें।
प्रेशर कुकर में कितनी सीटी लगाएं?
हर दाल को पकाने का समय एक जैसा नहीं होता। मूंग और मसूर जैसी दालें जल्दी पक जाती हैं, जबकि चना और उड़द को अपेक्षाकृत अधिक समय लग सकता है।इसलिए हर दाल के लिए निश्चित संख्या में सीटी लगाने का नियम अपनाने के बजाय उसकी मात्रा, भिगोने के समय और कुकर के आकार के अनुसार पकाने का समय तय करना बेहतर है।कुकर का प्रेशर स्वाभाविक रूप से निकलने देना भी उपयोगी होता है। तुरंत ढक्कन खोलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
हल्दी और मसालों का सही इस्तेमाल
दाल पकाते समय हल्दी का इस्तेमाल लगभग हर भारतीय रसोई में होता है। दाल के साथ हल्दी डालकर उसे पकाया जा सकता है। वहीं स्वाद के लिए नमक, लाल मिर्च, धनिया और दूसरे मसालों का इस्तेमाल अपनी पसंद के अनुसार किया जाता है।मसाले बहुत ज्यादा डालने से दाल का प्राकृतिक स्वाद दब सकता है। इसलिए मसालों की मात्रा संतुलित रखना बेहतर है।टमाटर जैसी खट्टी सामग्री कब डालनी है, यह भी दाल की किस्म और रेसिपी पर निर्भर करता है। कुछ दालों में टमाटर तड़के के साथ डालने से स्वाद बेहतर मिलता है।
तड़का है स्वाद की असली जान
साधारण दाल को स्वादिष्ट बनाने में तड़के की बड़ी भूमिका होती है। घी या तेल गर्म करके उसमें जीरा, हींग, लहसुन, प्याज, सूखी लाल मिर्च या हरी मिर्च डालकर तड़का तैयार किया जा सकता है।हर सामग्री एक साथ डालने के बजाय उनके पकने के समय का ध्यान रखना चाहिए। जीरा जलना नहीं चाहिए और लहसुन को इतना ही भूनें कि उसकी खुशबू आने लगे।तैयार तड़के को पकी हुई दाल में डालने के बाद कुछ समय ढककर रखने से उसकी खुशबू दाल में अच्छी तरह मिल सकती है।
दाल को जरूरत से ज्यादा न पकाएं
दाल नरम होनी चाहिए, लेकिन उसे जरूरत से ज्यादा पकाना हमेशा जरूरी नहीं है। कुछ दालें ज्यादा पकने पर पूरी तरह पेस्ट जैसी हो जाती हैं और उनका टेक्सचर खत्म हो जाता है।अगर आपको दानेदार दाल पसंद है तो पकाने का समय उसी अनुसार रखें। वहीं दाल मखनी या कुछ खास व्यंजनों में लंबा पकाना रेसिपी का हिस्सा हो सकता है।इसलिए दाल कितनी पकानी है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन सी दाल और किस शैली में बना रहे हैं।
स्वाद बढ़ाने के लिए नींबू और हरा धनिया
दाल तैयार होने के बाद ऊपर से ताजा हरा धनिया डालने से उसका स्वाद और खुशबू बढ़ सकती है। कई दालों के साथ नींबू का रस भी अच्छा लगता है।नींबू का रस आमतौर पर दाल पकने के बाद डालना बेहतर होता है। इससे उसका ताजा खट्टापन बना रहता है। हालांकि यह पूरी तरह स्वाद और रेसिपी पर निर्भर करता है।
अलग-अलग दालों को मिलाकर भी बनाएं
रोज एक ही दाल खाकर बोर हो गए हैं तो दो या तीन तरह की दालों को मिलाकर बनाया जा सकता है। मूंग-मसूर, अरहर-मसूर या पंचमेल दाल जैसे विकल्प खाने में विविधता ला सकते हैं।अलग-अलग दालों का स्वाद और बनावट अलग होती है। इन्हें मिलाकर बनाने से भोजन में विविधता आती है और अलग स्वाद भी मिलता है।
दाल को पौष्टिक कैसे बनाएं?
दाल पौधे से मिलने वाले प्रोटीन, फाइबर और कई पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हो सकती है। इसे चावल, रोटी और सब्जियों के साथ खाने से संतुलित भोजन तैयार करने में मदद मिलती है।दाल बनाते समय जरूरत से ज्यादा घी या तेल डालने की आवश्यकता नहीं है। स्वाद के लिए सीमित मात्रा में तड़का पर्याप्त हो सकता है। साथ में हरी सब्जियां, सलाद और अनाज शामिल करने से भोजन अधिक संतुलित बनाया जा सकता है।आखिरकार स्वादिष्ट दाल बनाने का कोई एक नियम नहीं है। दाल की किस्म के अनुसार भिगोने का समय, पानी और पकाने की अवधि बदलती है। सही सफाई, पर्याप्त पानी, नियंत्रित पकाने और संतुलित तड़के का ध्यान रखा जाए तो रोज बनने वाली साधारण दाल भी ज्यादा स्वादिष्ट और बेहतर बन सकती है।
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