मुंबई: अभिनेता और फिल्म निर्माता फरहान अख्तर को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक खबर पर उनके ट्रेनर ने प्रतिक्रिया दी है। दावा किया जा रहा था कि फरहान की ट्रेनिंग के कारण जिम के दूसरे सदस्य परेशान और नाराज हैं। सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज होने के बाद उनके ट्रेनर ने सामने आकर इन दावों पर सवाल उठाया और लोगों से किसी भी जानकारी को सच मानने से पहले तथ्यों की जांच करने की बात कही।
वायरल रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि फरहान अख्तर अपने आगामी प्रोजेक्ट के लिए कड़ी ट्रेनिंग कर रहे हैं और उनके वर्कआउट के दौरान जिम के एक हिस्से का इस्तेमाल प्रभावित होता है। इसी वजह से कथित तौर पर वहां आने वाले कुछ दूसरे सदस्यों को परेशानी हो रही है। यह दावा सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगा और कई यूजर्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं।
मामला चर्चा में आने के बाद फरहान के फिटनेस ट्रेनर ने चुप्पी तोड़ी। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए संकेत दिया कि ऐसी खबरों को शेयर करने से पहले फैक्ट-चेक किया जाना चाहिए। ट्रेनर की प्रतिक्रिया के बाद फरहान को लेकर किए जा रहे दावों पर नई बहस शुरू हो गई।

 

फरहान अख्तर अपनी फिटनेस को लेकर काफी अनुशासित माने जाते हैं। फिल्मों में किरदारों के अनुसार वह अपने शरीर और फिटनेस में बदलाव करते रहे हैं। ‘भाग मिल्खा भाग’ और ‘तूफान’ जैसी फिल्मों के लिए उनकी शारीरिक तैयारी पहले भी चर्चा में रही है। इन फिल्मों के लिए उन्होंने लंबे समय तक कड़ी ट्रेनिंग की थी।
सोशल मीडिया के दौर में सितारों से जुड़ी छोटी-बड़ी जानकारियां तेजी से वायरल हो जाती हैं। कई बार ऐसी खबरों में अनाम सूत्रों या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर दावे किए जाते हैं। ऐसे में संबंधित व्यक्ति या उनकी टीम की प्रतिक्रिया सामने आने तक दावों की स्वतंत्र पुष्टि करना मुश्किल हो सकता है।
फरहान के ट्रेनर की प्रतिक्रिया भी इसी ओर इशारा करती है। उन्होंने वायरल दावे को सीधे स्वीकार करने के बजाय उसकी तथ्यात्मकता पर सवाल उठाया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जिम के कितने सदस्यों ने वास्तव में शिकायत की थी या वायरल दावे का मूल स्रोत क्या था।
फरहान अख्तर की ओर से इस कथित विवाद पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि उनके ट्रेनर के बयान के बाद सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा ने लोगों का ध्यान जरूर खींचा है। ऐसे में जिम सदस्यों की नाराजगी से जुड़े दावों को आधिकारिक पुष्टि के बिना तथ्य के रूप में पेश करने से बचना जरूरी है।
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