क्यों यह Song आज भी singers के लिए मिसाल है

साहिर लुधियानवी का कमाल

Update: 2026-06-28 09:12 GMT

Entertainment मनोरंजन : भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर की फिल्मों में 1965 में रिलीज हुई फिल्म ‘काजल’ का नाम खास तौर पर लिया जाता है। इस फिल्म में मीना कुमारी, राज कुमार और धर्मेंद्र जैसे दिग्गज कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म की कहानी एक बेसहारा लड़की माधवी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे उस समय दर्शकों ने काफी सराहा था।

फिल्म ‘काजल’ अपने मजबूत कथानक के साथ-साथ अपने संगीत के लिए भी याद की जाती है। उस दौर में जब फिल्मों की सफलता में संगीत की बड़ी भूमिका होती थी, इस फिल्म के गानों ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली थी। फिल्म में कुल मिलाकर 12 गाने शामिल थे, जिनमें कई गीत सुपरहिट साबित हुए।

इनमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय गीत ‘छू लेने दो नाजुक होठों को’ रहा, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद मशहूर है। यह गीत फिल्म में राज कुमार और मीना कुमारी के किरदारों पर फिल्माया गया था, जहां भावनात्मक दृश्य के साथ इसकी प्रस्तुति ने दर्शकों को प्रभावित किया।

इस सदाबहार गीत को अपनी सुरीली आवाज दी थी मशहूर गायक मोहम्मद रफी ने। वहीं इसके संगीतकार रवि थे, जिन्होंने अपनी मधुर धुनों से इस गीत को और भी यादगार बना दिया। गीत के बोल प्रसिद्ध शायर और गीतकार साहिर लुधियानवी ने लिखे थे, जिनकी कलम से फिल्म के लगभग सभी गीत निकले थे।

साहिर लुधियानवी की शायरी और रवि के संगीत का यह मेल उस समय की फिल्मों की सबसे बड़ी ताकत माना जाता था। फिल्म ‘काजल’ के अन्य गीतों को भी उस दौर के लोकप्रिय गायकों जैसे आशा भोसले और महेंद्र कपूर ने अपनी आवाज दी थी, जिससे पूरा एल्बम बेहद सफल रहा।

आज भी यह फिल्म और इसका संगीत भारतीय सिनेमा के सुनहरे इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। खासकर ‘छू लेने दो नाजुक होठों को’ गीत, अपनी रोमांटिक और भावनात्मक प्रस्तुति के कारण समय की सीमाओं को पार कर चुका है और आज भी श्रोताओं के दिलों में बसा हुआ है।

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